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शब्द किसे कहते हैं? – परिभाषा, भेद, उदाहरण एवं सम्पूर्ण जानकारी

भाषा विचारों, भावों तथा अनुभूतियों को व्यक्त करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। भाषा की संरचना अनेक छोटी-छोटी इकाइयों से मिलकर होती है, जिनमें शब्द का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। शब्दों के बिना न तो वाक्य का निर्माण संभव है और न ही किसी विचार को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया जा सकता है।

हिंदी व्याकरण में शब्द भाषा की मूल एवं स्वतंत्र सार्थक इकाई माना जाता है। वर्णों के सार्थक मेल से शब्द बनते हैं और शब्दों के उचित क्रम से वाक्य का निर्माण होता है। इसलिए हिंदी व्याकरण के अध्ययन में शब्द की अवधारणा को समझना अत्यंत आवश्यक है।

UPSC, UGC NET, TGT, PGT, LT Grade, CTET, UPTET, Super TET, DSSSB, KVS, NVS, SSC, Railway तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में शब्द की परिभाषा, शब्द के भेद, शब्द और पद में अंतर, सार्थक एवं निरर्थक शब्द तथा रचना एवं उत्पत्ति के आधार पर शब्दों के वर्गीकरण से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

इस लेख में आप शब्द किसे कहते हैं, शब्द की परिभाषा, प्रमुख विद्वानों के मत, शब्द की विशेषताएँ, शब्द के भेद, शब्द और पद में अंतर, शब्द और वाक्य में अंतर, उदाहरण, सामान्य त्रुटियाँ तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के महत्वपूर्ण तथ्य विस्तार से पढ़ेंगे।

इस लेख में आप सीखेंगे—
  • शब्द किसे कहते हैं?
  • शब्द की परिभाषा
  • प्रमुख विद्वानों के अनुसार शब्द की परिभाषा
  • शब्द की विशेषताएँ
  • शब्द के भेद
  • शब्द और पद में अंतर
  • शब्द और वाक्य में अंतर
  • उदाहरण सहित सम्पूर्ण व्याख्या
  • प्रतियोगी परीक्षाओं के महत्वपूर्ण तथ्य

शब्द किसे कहते हैं?

दो या दो से अधिक वर्णों के सार्थक मेल से बनी स्वतंत्र भाषा-इकाई, जो किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, गुण, क्रिया, अवस्था अथवा भाव का बोध कराए, शब्द कहलाता है।

सरल शब्दों में, वर्णों का ऐसा सार्थक समूह, जिससे किसी निश्चित अर्थ का ज्ञान हो, शब्द कहलाता है।

उदाहरण

  • पुस्तक
  • विद्यालय
  • कमल
  • जल
  • बालक
  • सुंदर
  • चलना

उपरोक्त सभी शब्द किसी-न-किसी अर्थ का बोध कराते हैं, इसलिए ये सभी सार्थक शब्द हैं।

ध्यान दें: केवल वर्णों का समूह शब्द नहीं कहलाता। यदि उससे कोई निश्चित अर्थ न निकले, तो वह शब्द नहीं माना जाता।

उदाहरण

सार्थक शब्द: कमल, नदी, विद्यालय, किसान

निरर्थक वर्ण-समूह: मलक, तनर, जसप

पहले समूह के शब्द स्पष्ट अर्थ का बोध कराते हैं, जबकि दूसरे समूह से कोई निश्चित अर्थ नहीं निकलता। इसलिए पहले शब्द हैं और दूसरे केवल वर्ण-समूह हैं।

  • 👉 न, हाँ, ओ, ए आदि भी स्वतंत्र अर्थ में प्रयुक्त होकर शब्द हो सकते हैं।

शब्द की परिभाषा

विभिन्न व्याकरणाचार्यों ने शब्द की परिभाषा अपने-अपने दृष्टिकोण से दी है। यद्यपि उनकी अभिव्यक्ति में कुछ भिन्नता दिखाई देती है, परंतु सभी का मूल भाव यही है कि शब्द भाषा की वह स्वतंत्र सार्थक इकाई है, जो किसी अर्थ का बोध कराती है।

शब्द की परिभाषा (प्रमुख विद्वानों के अनुसार)

भारतीय तथा आधुनिक हिंदी व्याकरण के अनेक विद्वानों ने शब्द की परिभाषा अपने-अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत की है। यद्यपि उनकी अभिव्यक्ति में कुछ भिन्नता दिखाई देती है, परंतु सभी का मूल उद्देश्य शब्द को अर्थबोध कराने वाली भाषा की स्वतंत्र इकाई के रूप में स्पष्ट करना है।

1. पतंजलि

महर्षि पतंजलि के अनुसार जिस ध्वनि के उच्चारण से किसी पदार्थ, गुण, क्रिया या भाव का ज्ञान हो, उसे शब्द कहते हैं।

2. भर्तृहरि

भर्तृहरि ने शब्द को भाषा का मूल तत्त्व माना है। उनके अनुसार शब्द और अर्थ का संबंध अविभाज्य है तथा शब्द के माध्यम से ही अर्थ का बोध होता है।

3. आचार्य कामताप्रसाद गुरु

"जिस ध्वनि या ध्वनि-समूह से किसी अर्थ का बोध हो, उसे शब्द कहते हैं।"

यह परिभाषा हिंदी व्याकरण की सबसे अधिक प्रचलित एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण परिभाषाओं में से एक है।

4. डॉ. भोलानाथ तिवारी

डॉ. भोलानाथ तिवारी के अनुसार भाषा की सबसे छोटी स्वतंत्र सार्थक इकाई शब्द कहलाती है।

5. डॉ. वासुदेवनंदन प्रसाद

डॉ. वासुदेवनंदन प्रसाद के अनुसार वर्णों के सार्थक मेल से बना वह स्वतंत्र रूप, जो किसी अर्थ का बोध कराए, शब्द कहलाता है।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण
  • पतंजलि ने शब्द को अर्थबोध कराने वाली ध्वनि माना है।
  • भर्तृहरि ने शब्द और अर्थ के अविभाज्य संबंध पर बल दिया है।
  • कामताप्रसाद गुरु तथा डॉ. भोलानाथ तिवारी की परिभाषाएँ प्रतियोगी परीक्षाओं में अधिक पूछी जाती हैं।
  • शब्द का सबसे महत्वपूर्ण गुण सार्थकता है।

शब्द की प्रमुख विशेषताएँ

किसी भी शब्द में कुछ आवश्यक विशेषताएँ होती हैं। इन्हीं के आधार पर उसे शब्द के रूप में स्वीकार किया जाता है।

1. सार्थकता

शब्द का सबसे महत्वपूर्ण गुण यह है कि उससे किसी व्यक्ति, वस्तु, गुण, क्रिया, स्थान अथवा भाव का बोध होना चाहिए।

उदाहरण: जल, वृक्ष, विद्यालय, पुस्तक, बालक

2. स्वतंत्र अस्तित्व

शब्द भाषा की स्वतंत्र इकाई है। इसे वाक्य से अलग भी प्रयोग किया जा सकता है और फिर भी इसका अपना अर्थ बना रहता है।

उदाहरण: कमल, पर्वत, किसान

3. वर्णों से निर्मित होना

शब्द एक या एक से अधिक वर्णों के मेल से बनता है।

उदाहरण:

  • जल = ज + ल
  • घर = घ + र
  • कमल = क + म + ल
  • विद्यालय = वि + द्या + लय

4. अर्थबोध कराना

प्रत्येक शब्द का कोई-न-कोई निश्चित अर्थ होता है। यदि अर्थ का बोध नहीं होता, तो वह शब्द नहीं माना जाता।

5. पद बनने की क्षमता

5. पद बनने की क्षमता

जब कोई शब्द वाक्य में प्रयुक्त होकर अन्य शब्दों के साथ व्याकरणिक संबंध स्थापित करता है, तब वही पद कहलाता है।

ध्यान दें: प्रत्येक पद मूल रूप से शब्द होता है, लेकिन प्रत्येक शब्द पद नहीं होता।

शब्द के भेद

हिंदी व्याकरण में शब्दों का वर्गीकरण विभिन्न आधारों पर किया जाता है। मुख्य रूप से शब्दों के भेद निम्नलिखित तीन आधारों पर किए जाते हैं।

अर्थ के आधार पर शब्द के भेद

अर्थ के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण उनके द्वारा व्यक्त किए जाने वाले अर्थ के अनुसार किया जाता है। इस आधार पर शब्द दो प्रकार के होते हैं।

  1. सार्थक शब्द
  2. निरर्थक शब्द

1. सार्थक शब्द

जिन शब्दों से किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, गुण, क्रिया, अवस्था अथवा भाव का स्पष्ट अर्थ निकलता है, उन्हें सार्थक शब्द कहते हैं।

उदाहरण

  • कमल
  • विद्यालय
  • पुस्तक
  • बालक
  • नदी
  • चलना
  • सुंदर
  • भारत

उपरोक्त सभी शब्द किसी-न-किसी निश्चित अर्थ का बोध कराते हैं, इसलिए ये सार्थक शब्द हैं।

याद रखें: जिस शब्द से किसी अर्थ का बोध हो, वह सार्थक शब्द कहलाता है।

2. निरर्थक शब्द

जिन वर्ण-समूहों या शब्दों से कोई निश्चित अथवा स्पष्ट अर्थ नहीं निकलता, उन्हें निरर्थक शब्द कहते हैं।

उदाहरण

  • तनर
  • मलक
  • जसप
  • रवनक
  • सलग

इनसे कोई निश्चित अर्थ का बोध नहीं होता, इसलिए ये निरर्थक शब्द कहलाते हैं।

ध्यान दें: निरर्थक शब्द सामान्य भाषा-प्रयोग में स्वीकार्य नहीं होते। इन्हें केवल सार्थक और निरर्थक शब्दों का अंतर समझाने के लिए उदाहरण के रूप में प्रयोग किया जाता है।

सार्थक और निरर्थक शब्द में अंतर

आधार सार्थक शब्द निरर्थक शब्द
अर्थ स्पष्ट अर्थ का बोध कराते हैं। कोई निश्चित अर्थ नहीं बताते।
भाषा में प्रयोग सामान्य भाषा में प्रयुक्त होते हैं। सामान्य भाषा में प्रयुक्त नहीं होते।
उद्देश्य विचार एवं भाव व्यक्त करते हैं। अर्थ व्यक्त नहीं कर पाते।
उदाहरण घर, जल, विद्यालय, किसान तनर, मलक, जसप
आसान ट्रिक

सार्थक = सार + अर्थ → जिससे अर्थ का बोध हो।

निरर्थक = निर् + अर्थ → जिससे अर्थ का बोध न हो।

रचना के आधार पर शब्द के भेद

रचना के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण उनके निर्माण या संरचना के अनुसार किया जाता है। इस आधार पर शब्द तीन प्रकार के होते हैं।

  1. रूढ़ शब्द
  2. यौगिक शब्द
  3. योगरूढ़ शब्द

1. रूढ़ शब्द

जिन शब्दों के सार्थक खंड नहीं किए जा सकते तथा जो अपने मूल रूप में ही किसी निश्चित अर्थ का बोध कराते हैं, उन्हें रूढ़ शब्द कहते हैं।

अर्थात् ऐसे शब्द किसी अन्य सार्थक शब्द के मेल से नहीं बने होते, इसलिए इनके भाग करने पर कोई स्वतंत्र अर्थ प्राप्त नहीं होता।

उदाहरण

  • जल
  • घर
  • नाक
  • हाथ
  • पेड़
  • आकाश
  • सूर्य
  • चाँद
ध्यान दें: रूढ़ शब्दों के सार्थक टुकड़े नहीं किए जा सकते। ये अपने मूल रूप में ही अर्थ प्रदान करते हैं।

2. यौगिक शब्द

जो शब्द दो या दो से अधिक सार्थक शब्दों के मेल से बनते हैं तथा जिनके प्रत्येक खंड का स्वतंत्र अर्थ होता है, उन्हें यौगिक शब्द कहते हैं।

अर्थात् यदि किसी शब्द को विभाजित करने पर उसके प्रत्येक भाग का अलग-अलग अर्थ स्पष्ट हो, तो वह यौगिक शब्द कहलाता है।

उदाहरण

यौगिक शब्द खंड
विद्यालय विद्या + आलय
पुस्तकालय पुस्तक + आलय
राजपुत्र राज + पुत्र
रसोईघर रसोई + घर
हिमालय हिम + आलय
ध्यान रखें: यौगिक शब्दों के प्रत्येक भाग का अपना स्वतंत्र अर्थ होता है।

3. योगरूढ़ शब्द

जो शब्द रचना की दृष्टि से यौगिक हों, लेकिन उनका अर्थ उनके सामान्य खंडों के अर्थ से भिन्न होकर किसी विशेष अर्थ में प्रसिद्ध हो गया हो, उन्हें योगरूढ़ शब्द कहते हैं।

उदाहरण

योगरूढ़ शब्द शाब्दिक अर्थ प्रचलित अर्थ
पंकज पंक (कीचड़) + ज (जन्मा) कमल
लंबोदर लंबा उदर भगवान गणेश
नीलकंठ नीला कंठ भगवान शिव
दशानन दस मुख वाला रावण
याद रखने की ट्रिक:
  • रूढ़ → खंड नहीं किए जा सकते।
  • यौगिक → खंड करने पर प्रत्येक भाग का अर्थ स्पष्ट होता है।
  • योगरूढ़ → खंड तो किए जा सकते हैं, लेकिन पूरा शब्द विशेष अर्थ में प्रसिद्ध होता है।

रूढ़, यौगिक और योगरूढ़ शब्द में अंतर

आधार रूढ़ शब्द यौगिक शब्द योगरूढ़ शब्द
रचना सार्थक खंड नहीं होते। दो या अधिक सार्थक शब्दों से बने होते हैं। रचना यौगिक होती है।
अर्थ मूल रूप में अर्थ देते हैं। खंडों के अर्थ से पूरा अर्थ स्पष्ट होता है। पूरा शब्द विशेष अर्थ में प्रयुक्त होता है।
उदाहरण जल, घर, नाक विद्यालय, पुस्तकालय, राजपुत्र पंकज, नीलकंठ, लंबोदर

उत्पत्ति के आधार पर शब्द के भेद

उत्पत्ति के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण उनके स्रोत या मूल भाषा के आधार पर किया जाता है। इस आधार पर शब्द चार प्रकार के होते हैं।

  1. तत्सम शब्द
  2. तद्भव शब्द
  3. देशज शब्द
  4. विदेशी शब्द

1. तत्सम शब्द

जो शब्द संस्कृत भाषा से बिना किसी परिवर्तन के सीधे हिंदी में ग्रहण किए गए हैं, उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं। इन शब्दों का रूप, उच्चारण और वर्तनी संस्कृत के समान ही रहती है।

उदाहरण

  • अग्नि
  • सूर्य
  • विद्या
  • मित्र
  • पुस्तक
  • ग्राम
  • रात्रि
  • कर्म
याद रखें: तत्सम शब्द संस्कृत से ज्यों-के-त्यों हिंदी में लिए जाते हैं, इसलिए इनके रूप में कोई परिवर्तन नहीं होता।

2. तद्भव शब्द

जो शब्द संस्कृत भाषा से विकसित होकर समय के साथ अपने मूल रूप में परिवर्तन के बाद हिंदी में प्रचलित हुए हैं, उन्हें तद्भव शब्द कहते हैं।

उदाहरण

तत्सम शब्द तद्भव शब्द
अग्नि आग
दन्त दाँत
कर्ण कान
नयन नैन
दुग्ध दूध
ग्राम गाँव
हस्त हाथ
जिह्वा जीभ
ध्यान दें: प्रत्येक तद्भव शब्द का मूल स्रोत संस्कृत होता है, लेकिन समय के साथ उसका रूप परिवर्तित हो जाता है।

3. देशज शब्द

जो शब्द संस्कृत अथवा किसी विदेशी भाषा से ग्रहण नहीं किए गए, बल्कि भारतीय लोकभाषाओं, बोलियों और जनभाषा से विकसित होकर हिंदी में प्रचलित हुए हैं, उन्हें देशज शब्द कहते हैं।

उदाहरण

  • खटिया
  • चूल्हा
  • लोटा
  • झोपड़ी
  • टोकरी
  • डिब्बा
  • ढेला
  • पगड़ी
ध्यान दें: देशज शब्द भारतीय लोकजीवन और लोकभाषाओं की देन हैं।

4. विदेशी शब्द

जो शब्द अन्य देशों की भाषाओं से हिंदी में आए हैं, उन्हें विदेशी शब्द कहते हैं। हिंदी भाषा ने समय-समय पर अनेक विदेशी भाषाओं के शब्दों को अपनाया है, जो आज सामान्य बोलचाल और लेखन का हिस्सा बन चुके हैं।

उदाहरण

भाषा उदाहरण
अरबी किताब, हिसाब, अदालत, तारीख
फ़ारसी दरवाज़ा, बाज़ार, दीवार, गुलाब
तुर्की तोप, तमगा, उर्दू, बहादुर
अंग्रेज़ी रेल, स्टेशन, डॉक्टर, पुलिस
पुर्तगाली अलमारी, बाल्टी, साबुन, चाबी
परीक्षा की दृष्टि से: विदेशी शब्दों के साथ उनकी मूल भाषा का ज्ञान भी महत्वपूर्ण है। प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसे प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।

विदेशी भाषाओं से आए प्रमुख शब्द

हिंदी भाषा में अनेक विदेशी भाषाओं के शब्द प्रचलित हैं। नीचे प्रमुख भाषाओं तथा उनसे हिंदी में आए कुछ महत्वपूर्ण शब्द दिए गए हैं।

भाषा प्रमुख शब्द
अरबी किताब, हिसाब, अदालत, अख़बार, हकीकत, तारीख
फ़ारसी दरवाज़ा, बाज़ार, दीवार, गुलाब, पर्दा, ज़मीन
तुर्की तोप, तमगा, उर्दू, बहादुर, लाश
अंग्रेज़ी रेल, स्टेशन, डॉक्टर, बैंक, पुलिस, टिकट, स्कूल
पुर्तगाली अलमारी, बाल्टी, साबुन, चाबी, तौलिया, पिस्तौल

तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशी शब्द में अंतर

आधार तत्सम तद्भव देशज विदेशी
स्रोत संस्कृत संस्कृत से विकसित लोकभाषाएँ एवं बोलियाँ विदेशी भाषाएँ
रूप मूल रूप सुरक्षित रहता है। मूल रूप परिवर्तित हो जाता है। स्थानीय रूप से विकसित होते हैं। मूल भाषा से ग्रहण किए जाते हैं।
उदाहरण अग्नि, मित्र आग, कान खटिया, चूल्हा रेल, बाज़ार, अलमारी
याद रखने की ट्रिक
  • तत्सम → संस्कृत से ज्यों-का-त्यों।
  • तद्भव → संस्कृत से रूप बदलकर।
  • देशज → लोकभाषाओं एवं बोलियों से।
  • विदेशी → अन्य भाषाओं से हिंदी में आए शब्द।

शब्द और पद में अंतर

शब्द और पद दोनों हिंदी व्याकरण की महत्वपूर्ण इकाइयाँ हैं, किंतु दोनों का अर्थ समान नहीं है। शब्द भाषा की स्वतंत्र सार्थक इकाई है, जबकि वही शब्द जब वाक्य में प्रयुक्त होकर अन्य शब्दों से व्याकरणिक संबंध स्थापित करता है, तब पद कहलाता है। इसलिए प्रत्येक पद शब्द होता है, लेकिन प्रत्येक शब्द पद नहीं होता।

आधार शब्द पद
परिभाषा अर्थ का बोध कराने वाली स्वतंत्र भाषा-इकाई। वाक्य में प्रयुक्त शब्द।
वाक्य से संबंध वाक्य में हो भी सकता है और नहीं भी। हमेशा वाक्य का अंग होता है।
व्याकरणिक संबंध अनिवार्य नहीं। अन्य पदों से व्याकरणिक संबंध रखता है।
रूप परिवर्तन सामान्य रूप में रहता है। लिंग, वचन, कारक आदि के अनुसार बदल सकता है।
उदाहरण राम, पुस्तक, विद्यालय राम विद्यालय जाता है।
याद रखें: शब्द + वाक्य = पद
जब कोई शब्द वाक्य में प्रयुक्त होता है, तभी वह पद कहलाता है।

शब्द और वाक्य में अंतर

शब्द भाषा की मूल इकाई है, जबकि वाक्य शब्दों का ऐसा व्यवस्थित समूह है, जो पूर्ण अर्थ का बोध कराता है। दोनों का संबंध अत्यंत निकट है, क्योंकि शब्दों के बिना वाक्य का निर्माण संभव नहीं है।

आधार शब्द वाक्य
परिभाषा अर्थ का बोध कराने वाली स्वतंत्र इकाई। पूर्ण अर्थ व्यक्त करने वाला शब्द-समूह।
संरचना एक या एक से अधिक वर्णों से बनता है। एक या एक से अधिक शब्दों से बनता है।
अर्थ पूर्ण विचार व्यक्त नहीं करता। पूर्ण विचार व्यक्त करता है।
उदाहरण विद्यालय विद्यालय आज बंद है।

शब्द की पहचान कैसे करें?

किसी भाषा-इकाई के शब्द होने या न होने की पहचान निम्नलिखित आधारों पर की जा सकती है—

  • क्या उससे किसी निश्चित अर्थ का बोध होता है?
  • क्या वह भाषा की स्वतंत्र इकाई है?
  • क्या उसका प्रयोग सामान्य भाषा में किया जाता है?
  • क्या वह किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, गुण, क्रिया अथवा भाव का ज्ञान कराता है?
आसान ट्रिक:

अर्थ का बोध + स्वतंत्र प्रयोग = शब्द

यदि किसी वर्ण-समूह से स्पष्ट अर्थ निकलता है और उसका स्वतंत्र प्रयोग किया जा सकता है, तो वह शब्द है।

शब्द से संबंधित सामान्य अशुद्धियाँ

गलत धारणा सही तथ्य
प्रत्येक वर्ण-समूह शब्द होता है। केवल सार्थक वर्ण-समूह ही शब्द कहलाता है।
शब्द और पद समान हैं। वाक्य में प्रयुक्त शब्द ही पद कहलाता है।
सभी शब्द तत्सम होते हैं। शब्दों का वर्गीकरण विभिन्न आधारों पर किया जाता है।
देशज और विदेशी शब्द एक ही होते हैं। दोनों के स्रोत अलग-अलग होते हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

परीक्षा की दृष्टि से याद रखें—
  • शब्द भाषा की सबसे छोटी स्वतंत्र सार्थक इकाई है।
  • दो या दो से अधिक वर्णों के सार्थक मेल से शब्द बनता है।
  • शब्दों के उचित क्रम से वाक्य का निर्माण होता है।
  • अर्थ के आधार पर शब्द दो प्रकार के होते हैं— सार्थक और निरर्थक
  • रचना के आधार पर शब्द तीन प्रकार के होते हैं— रूढ़, यौगिक और योगरूढ़
  • उत्पत्ति के आधार पर शब्द चार प्रकार के होते हैं— तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशी
  • वाक्य में प्रयुक्त शब्द को पद कहते हैं।
  • प्रत्येक पद शब्द होता है, लेकिन प्रत्येक शब्द पद नहीं होता।
  • शब्द से ही पद तथा पदों से वाक्य का निर्माण होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

शब्द किसे कहते हैं?

दो या दो से अधिक वर्णों के सार्थक मेल से बनी स्वतंत्र भाषा-इकाई, जो किसी अर्थ का बोध कराए, शब्द कहलाता है।

शब्द की परिभाषा क्या है?

जिस वर्ण-समूह से किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, गुण, क्रिया, अवस्था या भाव का बोध हो, उसे शब्द कहते हैं।

शब्द के कितने भेद होते हैं?

शब्दों का वर्गीकरण विभिन्न आधारों पर किया जाता है। मुख्य रूप से अर्थ के आधार पर दो, रचना के आधार पर तीन तथा उत्पत्ति के आधार पर चार भेद माने जाते हैं।

सार्थक शब्द किसे कहते हैं?

जिस शब्द से किसी निश्चित अर्थ का बोध होता है, उसे सार्थक शब्द कहते हैं।

निरर्थक शब्द किसे कहते हैं?

जिस वर्ण-समूह या शब्द से कोई निश्चित अर्थ का बोध नहीं होता, उसे निरर्थक शब्द कहते हैं।

तत्सम और तद्भव शब्द में क्या अंतर है?

तत्सम शब्द संस्कृत से बिना किसी परिवर्तन के लिए जाते हैं, जबकि तद्भव शब्द संस्कृत से विकसित होकर परिवर्तित रूप में हिंदी में प्रचलित होते हैं।

देशज शब्द किसे कहते हैं?

जो शब्द भारतीय लोकभाषाओं एवं बोलियों से विकसित होकर हिंदी में प्रचलित हुए हैं, उन्हें देशज शब्द कहते हैं।

विदेशी शब्द किसे कहते हैं?

जो शब्द अन्य देशों की भाषाओं से हिंदी में आए हैं, उन्हें विदेशी शब्द कहते हैं।

शब्द और पद में क्या अंतर है?

शब्द भाषा की स्वतंत्र सार्थक इकाई है, जबकि वाक्य में प्रयुक्त वही शब्द पद कहलाता है।

शब्द की पहचान कैसे करें?

यदि किसी वर्ण-समूह से स्पष्ट अर्थ का बोध होता है और उसका स्वतंत्र प्रयोग किया जा सकता है, तो वह शब्द कहलाता है।

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निष्कर्ष

शब्द हिंदी भाषा और व्याकरण की आधारभूत इकाई है। भाषा का संपूर्ण ढाँचा शब्दों पर आधारित होता है तथा इन्हीं शब्दों के उचित क्रम से पद और वाक्य का निर्माण होता है। इसलिए शब्द की सही समझ हिंदी व्याकरण की मजबूत नींव तैयार करती है।

इस लेख में आपने शब्द किसे कहते हैं, शब्द की परिभाषा, प्रमुख विद्वानों के मत, शब्द की विशेषताएँ, शब्द के भेद, सार्थक एवं निरर्थक शब्द, रचना एवं उत्पत्ति के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण, शब्द और पद में अंतर तथा शब्द और वाक्य में अंतर का विस्तार से अध्ययन किया। यदि इन सभी अवधारणाओं का नियमित अभ्यास किया जाए, तो हिंदी व्याकरण से संबंधित अधिकांश प्रश्नों का उत्तर सरलता से दिया जा सकता है।

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