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पद किसे कहते हैं? – परिभाषा, भेद, उदाहरण एवं सम्पूर्ण जानकारी

भाषा की सबसे छोटी सार्थक इकाई शब्द होती है, लेकिन जब यही शब्द किसी वाक्य में प्रयुक्त होकर व्याकरणिक संबंध स्थापित करता है, तब उसे पद कहा जाता है। इसलिए हिंदी व्याकरण में शब्द और पद एक-दूसरे से जुड़े होने पर भी समान नहीं हैं।

सरल शब्दों में कहें तो प्रत्येक पद मूल रूप से शब्द ही होता है, किंतु सभी शब्द पद नहीं होते। कोई शब्द तभी पद कहलाता है, जब उसका प्रयोग किसी वाक्य में किया जाए और वह अन्य शब्दों के साथ व्याकरणिक संबंध स्थापित करे।

हिंदी व्याकरण में पद का अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। UPSC, UGC NET, TGT, PGT, LT Grade, CTET, UPTET, Super TET, DSSSB, KVS, NVS, SSC, Railway तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पद की परिभाषा, पद के भेद, शब्द और पद में अंतर तथा पद के उदाहरणों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

इस लेख में आप पद किसे कहते हैं, पद की परिभाषा, प्रमुख विद्वानों के मत, पद के भेद, शब्द और पद में अंतर, उदाहरण, सामान्य त्रुटियाँ, परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य तथा अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न विस्तार से पढ़ेंगे।

इस लेख में आप सीखेंगे—
  • पद किसे कहते हैं?
  • पद की परिभाषा
  • प्रमुख विद्वानों की परिभाषाएँ
  • पद के भेद
  • शब्द और पद में अंतर
  • पद की पहचान कैसे करें?
  • उदाहरण सहित सम्पूर्ण व्याख्या
  • प्रतियोगी परीक्षाओं के महत्वपूर्ण तथ्य

पद किसे कहते हैं?

जब कोई शब्द वाक्य में प्रयुक्त होकर अन्य शब्दों के साथ व्याकरणिक संबंध स्थापित करता है, तब वह पद कहलाता है।

दूसरे शब्दों में, वाक्य में प्रयुक्त प्रत्येक सार्थक शब्द पद कहलाता है। वाक्य से बाहर वही शब्द केवल शब्द होता है, जबकि वाक्य में प्रयुक्त होने पर वह पद बन जाता है।

उदाहरण

शब्द: राम, पुस्तक, पढ़ना

वाक्य: राम पुस्तक पढ़ता है।

इस वाक्य में राम, पुस्तक, पढ़ता तथा है — सभी पद हैं, क्योंकि ये वाक्य में प्रयुक्त होकर पूर्ण अर्थ का निर्माण कर रहे हैं।

ध्यान दें: प्रत्येक पद शब्द होता है, लेकिन प्रत्येक शब्द पद नहीं होता। शब्द तभी पद बनता है, जब उसका प्रयोग किसी वाक्य में किया जाए।

एक और उदाहरण

शब्द: बच्चा

यह केवल एक शब्द है।

वाक्य: बच्चा खेल रहा है।

यहाँ बच्चा वाक्य का अंग बन गया है, इसलिए अब यह पद कहलाएगा।

पद की परिभाषा

विभिन्न व्याकरणाचार्यों ने पद की परिभाषा अपने-अपने दृष्टिकोण से दी है। यद्यपि शब्दों में कुछ भिन्नता है, परंतु सभी का मूल आशय यही है कि वाक्य में प्रयुक्त शब्द ही पद कहलाता है।

पद की परिभाषा (प्रमुख विद्वानों के अनुसार)

भारतीय तथा आधुनिक हिंदी व्याकरण के अनेक विद्वानों ने पद की परिभाषा अपने-अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत की है। इन सभी परिभाषाओं का मूल भाव यह है कि वाक्य में प्रयुक्त व्याकरणिक रूप वाला शब्द ही पद कहलाता है।

1. पाणिनि

महर्षि पाणिनि ने अष्टाध्यायी में पद की परिभाषा इस प्रकार दी है—

सुप्तिङन्तं पदम्।

अर्थात् सुप् (सुबन्त) अथवा तिङ् (तिडन्त) प्रत्यय से युक्त शब्द पद कहलाता है।

और सरल शब्दों में समझाएँ तो जिस शब्द में सुप् (संज्ञा आदि के विभक्ति-प्रत्यय) अथवा तिङ् (क्रिया के पुरुष एवं वचन सूचक प्रत्यय) लगे हों, वह पद कहलाता है।

परीक्षा की दृष्टि से: "सुप्तिङन्तं पदम्" पाणिनि का अत्यंत प्रसिद्ध सूत्र है और प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है।

2. पतंजलि

पतंजलि के अनुसार वह शब्द, जो वाक्य में प्रयुक्त होकर अर्थबोध कराता है, पद कहलाता है।

3. भर्तृहरि

भर्तृहरि के अनुसार पद वाक्य का अविभाज्य अंग है तथा वाक्य के माध्यम से ही उसका वास्तविक अर्थ स्पष्ट होता है।

4. आचार्य कामताप्रसाद गुरु

"वाक्य में प्रयुक्त शब्द को पद कहते हैं।"

यह परिभाषा हिंदी व्याकरण में सर्वाधिक प्रचलित मानी जाती है और प्रतियोगी परीक्षाओं में विशेष रूप से पूछी जाती है।

5. डॉ. भोलानाथ तिवारी

डॉ. भोलानाथ तिवारी के अनुसार वाक्य में प्रयुक्त प्रत्येक शब्द पद कहलाता है, क्योंकि वहीं उसका व्याकरणिक स्वरूप स्पष्ट होता है।

6. डॉ. वासुदेवनंदन प्रसाद

डॉ. वासुदेवनंदन प्रसाद के अनुसार वाक्य में प्रयुक्त शब्द, जो अन्य शब्दों के साथ व्याकरणिक संबंध स्थापित करे, पद कहलाता है।

याद रखने योग्य तथ्य
  • सुप्तिङन्तं पदम् — पाणिनि
  • वाक्य में प्रयुक्त शब्द ही पद है — आधुनिक हिंदी व्याकरण का मूल सिद्धांत
  • कामताप्रसाद गुरु की परिभाषा प्रतियोगी परीक्षाओं में सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।

पद की प्रमुख विशेषताएँ

किसी शब्द को पद बनने के लिए कुछ आवश्यक विशेषताओं का होना अनिवार्य है। इन्हीं के आधार पर पद की पहचान की जाती है।

1. वाक्य में प्रयोग

कोई भी शब्द तभी पद कहलाता है, जब उसका प्रयोग किसी वाक्य में किया जाए।

उदाहरण:

शब्द: विद्यालय

वाक्य: छात्र विद्यालय जा रहे हैं।

2. व्याकरणिक संबंध

पद का वाक्य के अन्य पदों से व्याकरणिक संबंध होता है। यही संबंध वाक्य को अर्थपूर्ण बनाता है।

3. पूर्ण अर्थ निर्माण में सहयोग

पद अकेले पूर्ण विचार व्यक्त नहीं करता, बल्कि अन्य पदों के साथ मिलकर वाक्य का निर्माण करता है।

4. रूप परिवर्तन की संभावना

वाक्य में प्रयुक्त होने पर शब्द का रूप लिंग, वचन, पुरुष, कारक अथवा काल के अनुसार परिवर्तित हो सकता है। यही परिवर्तन उसे व्याकरणिक रूप प्रदान करता है।

उदाहरण:

  • लड़का विद्यालय जाता है।
  • लड़के विद्यालय जाते हैं।
महत्वपूर्ण: प्रत्येक पद शब्द होता है, परंतु प्रत्येक शब्द पद नहीं होता। वाक्य में प्रयुक्त होने पर ही शब्द पद का रूप ग्रहण करता है।

पद के भेद

हिंदी व्याकरण में पदों का वर्गीकरण मुख्यतः दो आधारों पर किया जाता है। यह वर्गीकरण शब्दों के अर्थ और वाक्य में उनके कार्य के आधार पर किया जाता है।

  1. विकारी पद
  2. अविकारी पद (अव्यय)

प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रायः पूछा जाता है कि पद के कितने भेद होते हैं? इसका सही उत्तर है— दो

1. विकारी पद

जिन पदों के रूप में लिंग, वचन, पुरुष, कारक अथवा काल के अनुसार परिवर्तन होता है, उन्हें विकारी पद कहते हैं।

हिंदी व्याकरण में विकारी पद चार प्रकार के होते हैं—

  • संज्ञा
  • सर्वनाम
  • विशेषण
  • क्रिया

उदाहरण

  • लड़का → लड़के
  • अच्छा → अच्छे
  • मैं → हम
  • जाता है → जाते हैं
ध्यान दें: जिन पदों का रूप बदल सकता है, वे सभी विकारी पद कहलाते हैं।

2. अविकारी पद (अव्यय)

जिन पदों के रूप में लिंग, वचन, पुरुष, कारक अथवा काल के अनुसार कोई परिवर्तन नहीं होता, उन्हें अविकारी पद या अव्यय कहते हैं।

अव्यय सदैव एक ही रूप में प्रयुक्त होते हैं।

उदाहरण

  • आज
  • कल
  • यहाँ
  • वहाँ
  • किन्तु
  • और
  • अतः
  • यदि
ध्यान दें: अविकारी पदों का रूप कभी नहीं बदलता, इसलिए इन्हें अव्यय भी कहा जाता है।

विकारी और अविकारी पद में अंतर

आधार विकारी पद अविकारी पद
रूप परिवर्तन रूप बदलता है। रूप नहीं बदलता।
व्याकरणिक प्रभाव लिंग, वचन, पुरुष, कारक एवं काल से प्रभावित इनसे प्रभावित नहीं
संख्या चार प्रकार एक वर्ग (अव्यय)
उदाहरण राम, वह, अच्छा, जाता है आज, यहाँ, तथा, लेकिन
याद रखने की ट्रिक

विकारी = विकार (परिवर्तन) होता है।
विकारी = र्थात् परिवर्तन नहीं होता।

शब्द और पद में अंतर

शब्द और पद देखने में समान प्रतीत होते हैं, किंतु व्याकरण की दृष्टि से दोनों में महत्वपूर्ण अंतर है। प्रत्येक पद शब्द होता है, परंतु प्रत्येक शब्द पद नहीं होता। कोई शब्द तभी पद कहलाता है, जब उसका प्रयोग किसी वाक्य में किया जाए।

आधार शब्द पद
परिभाषा सार्थक वर्णों का समूह शब्द कहलाता है। वाक्य में प्रयुक्त शब्द पद कहलाता है।
वाक्य से संबंध वाक्य में हो भी सकता है और नहीं भी। हमेशा वाक्य का अंग होता है।
व्याकरणिक संबंध अनिवार्य नहीं। अन्य पदों से व्याकरणिक संबंध रखता है।
रूप सामान्य रूप में रहता है। लिंग, वचन, कारक आदि के अनुसार रूप बदल सकता है।
उदाहरण राम, पुस्तक, विद्यालय राम विद्यालय जाता है।
ध्यान रखें: शब्द भाषा की स्वतंत्र इकाई है, जबकि पद वाक्य की व्याकरणिक इकाई है।

पद और वाक्य में अंतर

पद और वाक्य का संबंध अत्यंत निकट है, फिर भी दोनों अलग-अलग व्याकरणिक इकाइयाँ हैं। पद वाक्य का एक अंग होता है, जबकि वाक्य कई पदों के मेल से बनता है।

आधार पद वाक्य
परिभाषा वाक्य में प्रयुक्त शब्द पूर्ण अर्थ देने वाला पद-समूह
अर्थ अकेला पूर्ण विचार व्यक्त नहीं करता। पूर्ण विचार व्यक्त करता है।
संरचना एक शब्द या व्याकरणिक इकाई एक या अधिक पदों का समूह
कार्य वाक्य का निर्माण करना विचार या भाव व्यक्त करना
उदाहरण राम, जाता, विद्यालय राम विद्यालय जाता है।

पद की पहचान कैसे करें?

किसी शब्द के पद होने या न होने की पहचान निम्नलिखित आधारों पर की जा सकती है—

  • क्या शब्द किसी वाक्य में प्रयुक्त हुआ है?
  • क्या उसका अन्य शब्दों से व्याकरणिक संबंध है?
  • क्या वह वाक्य के अर्थ-निर्माण में योगदान दे रहा है?
  • क्या वह कर्ता, कर्म, विशेषण, क्रिया या अव्यय के रूप में कार्य कर रहा है?
याद रखने की आसान ट्रिक:

शब्द + वाक्य = पद

यदि कोई शब्द वाक्य में प्रयुक्त है, तो वही पद कहलाएगा।

पद से संबंधित सामान्य अशुद्धियाँ

गलत धारणा सही तथ्य
प्रत्येक शब्द पद होता है। शब्द तभी पद बनता है, जब वह वाक्य में प्रयुक्त हो।
पद और शब्द में कोई अंतर नहीं है। दोनों अलग-अलग व्याकरणिक इकाइयाँ हैं।
पद के अनेक मुख्य भेद हैं। मुख्यतः दो भेद— विकारी एवं अविकारी।
अव्यय भी विकारी पद है। अव्यय अविकारी पद है।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

परीक्षा की दृष्टि से याद रखें—
  • पद, वाक्य में प्रयुक्त शब्द को कहते हैं।
  • प्रत्येक पद शब्द होता है, लेकिन प्रत्येक शब्द पद नहीं होता।
  • महर्षि पाणिनि ने पद की परिभाषा "सुप्तिङन्तं पदम्" सूत्र द्वारा दी है।
  • पद के दो मुख्य भेद हैं— विकारी तथा अविकारी
  • विकारी पद चार हैं— संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया।
  • अविकारी पद को अव्यय भी कहा जाता है।
  • वाक्य में प्रयुक्त प्रत्येक शब्द पद कहलाता है।
  • शब्द भाषा की इकाई है, जबकि पद वाक्य की व्याकरणिक इकाई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

पद किसे कहते हैं?

वाक्य में प्रयुक्त वह शब्द, जो अन्य शब्दों के साथ व्याकरणिक संबंध स्थापित करे, पद कहलाता है।

पद की सबसे सरल परिभाषा क्या है?

वाक्य में प्रयुक्त प्रत्येक शब्द पद कहलाता है।

पद के कितने भेद होते हैं?

पद के दो मुख्य भेद होते हैं— विकारी पद और अविकारी पद

विकारी पद कितने प्रकार के होते हैं?

विकारी पद चार प्रकार के होते हैं— संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया।

अविकारी पद किसे कहते हैं?

जिन पदों के रूप में लिंग, वचन, पुरुष, कारक अथवा काल के अनुसार कोई परिवर्तन नहीं होता, उन्हें अविकारी पद या अव्यय कहते हैं।

शब्द और पद में क्या अंतर है?

शब्द भाषा की स्वतंत्र इकाई है, जबकि वाक्य में प्रयुक्त वही शब्द पद कहलाता है।

क्या प्रत्येक शब्द पद होता है?

नहीं। प्रत्येक शब्द पद नहीं होता। शब्द तभी पद बनता है, जब उसका प्रयोग किसी वाक्य में किया जाए।

पद की पहचान कैसे करें?

यदि कोई शब्द वाक्य में प्रयुक्त होकर अन्य शब्दों से व्याकरणिक संबंध स्थापित कर रहा है, तो वह पद है।

पद के उदाहरण

  • राम विद्यालय जाता है।
  • सीता पुस्तक पढ़ रही है।
  • बच्चे मैदान में खेल रहे हैं।
  • आज मौसम सुहावना है।
  • वह बहुत तेज दौड़ता है।

इन वाक्यों में प्रयुक्त प्रत्येक शब्द पद है, क्योंकि सभी शब्द वाक्य में प्रयुक्त होकर व्याकरणिक संबंध स्थापित कर रहे हैं।

निष्कर्ष

पद हिंदी व्याकरण की एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवधारणा है। वाक्य में प्रयुक्त प्रत्येक शब्द पद कहलाता है और वही वाक्य के अर्थ-निर्माण में अपनी भूमिका निभाता है। इसलिए शब्द और पद का अंतर समझना प्रत्येक विद्यार्थी के लिए आवश्यक है।

इस लेख में आपने पद किसे कहते हैं, पद की परिभाषा, प्रमुख विद्वानों के मत, पद के भेद, शब्द और पद में अंतर, पद की पहचान तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के महत्वपूर्ण तथ्यों का विस्तृत अध्ययन किया। यदि इन सभी बिंदुओं का नियमित अभ्यास किया जाए, तो हिंदी व्याकरण से संबंधित अधिकांश प्रश्नों का उत्तर सरलता से दिया जा सकता है।

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