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प्रत्यय किसे कहते हैं? परिभाषा, भेद, प्रकार, उदाहरण एवं महत्वपूर्ण प्रश्न

जब किसी शब्द के अंत में कोई विशेष वर्ण या वर्णों का समूह जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन कर देता है या नया शब्द बना देता है, तो उसे प्रत्यय कहते हैं। हिंदी व्याकरण में प्रत्यय शब्द-रचना का एक महत्वपूर्ण अंग है। इसके माध्यम से भाषा में नए-नए शब्दों का निर्माण होता है, जिससे भाषा अधिक समृद्ध और प्रभावशाली बनती है।

इस लेख में आप प्रत्यय का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ, भेद, कृत प्रत्यय, तद्धित प्रत्यय, हिंदी के प्रमुख प्रत्यय, प्रत्यय पहचानने की सरल विधि, उपसर्ग और प्रत्यय में अंतर तथा परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्नों को सरल भाषा में विस्तार से समझेंगे।

प्रत्यय का अर्थ और परिचय

प्रत्यय शब्द संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका सामान्य अर्थ 'पीछे लगने वाला' या 'बाद में जुड़ने वाला' होता है। व्याकरण की दृष्टि से प्रत्यय वह वर्ण, अक्षर या वर्णों का समूह है जो किसी मूल शब्द (प्रकृति) के अंत में जुड़कर नया शब्द बनाता है या उसके अर्थ में परिवर्तन करता है।

प्रत्यय स्वयं स्वतंत्र शब्द नहीं होता, बल्कि यह किसी मूल शब्द के साथ मिलकर कार्य करता है। यदि प्रत्यय को मूल शब्द से अलग कर दिया जाए, तो उसका सामान्यतः कोई स्वतंत्र अर्थ नहीं रह जाता। इसलिए इसे पराश्रित शब्दांश भी कहा जाता है।

उदाहरण:

  • सफल + ता = सफलता
  • मधुर + ता = मधुरता
  • बाल + क = बालक
  • दयालु + ता = दयालुता
  • मित्र + ता = मित्रता

इन उदाहरणों में ता और प्रत्यय हैं। ये मूल शब्द के अंत में जुड़कर नया शब्द बना रहे हैं।

प्रत्यय को सरल शब्दों में समझें

यदि किसी शब्द के अंत में कोई वर्ण या वर्ण-समूह जुड़ने से नया शब्द बन जाए या उसके अर्थ में परिवर्तन हो जाए, तो अंत में जुड़ने वाला भाग प्रत्यय कहलाता है।

मूल शब्द प्रत्यय नया शब्द
मीठा आस मिठास
बच्चा पन बचपन
अपना पन अपनापन
अच्छा अच्छाई
बड़ा प्पन बड़प्पन

उपरोक्त उदाहरणों से स्पष्ट है कि प्रत्यय हमेशा शब्द के अंत में जुड़ता है और नया शब्द बनाता है या उसके अर्थ में परिवर्तन करता है। यही प्रत्यय की सबसे प्रमुख विशेषता है।

 प्रत्यय की परिभाषा

जो पराश्रित शब्दांश किसी मूल शब्द या धातु के अंत में जुड़कर नया शब्द बनाता है अथवा उसके अर्थ या रूप में परिवर्तन करता है, उसे प्रत्यय कहते हैं। प्रत्यय का स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता; यह सदैव किसी आधार शब्द के साथ ही प्रयुक्त होता है।

डॉ. कामता प्रसाद गुरु के अनुसार, "जो वर्ण या वर्ण-समूह शब्दों के अंत में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते हैं।"

डॉ. भोलानाथ तिवारी के अनुसार, "प्रकृति के अंत में जुड़कर नया शब्द बनाने वाले पराश्रित शब्दांश को प्रत्यय कहते हैं।"

इन परिभाषाओं से स्पष्ट होता है कि प्रत्यय स्वयं स्वतंत्र शब्द नहीं होता, बल्कि वह किसी मूल शब्द के साथ जुड़कर ही अपना कार्य करता है।

प्रत्यय की परिभाषा को उदाहरण सहित समझें

निम्न उदाहरणों को ध्यान से देखें—

मूल शब्द प्रत्यय नया शब्द
सुंदर ता सुंदरता
मानव ता मानवता
बाल बालक
मित्र ता मित्रता
मीठा आस मिठास
अपना पन अपनापन

उपरोक्त सभी उदाहरणों में ता, क, आस तथा पन प्रत्यय हैं। ये मूल शब्द के अंत में जुड़कर नए शब्दों का निर्माण कर रहे हैं। यदि इन प्रत्ययों को हटा दिया जाए, तो मूल शब्द तो बच जाता है, लेकिन नया बना हुआ शब्द समाप्त हो जाता है।

प्रत्यय की परिभाषा के मुख्य बिंदु

  • प्रत्यय हमेशा किसी शब्द के अंत में लगाया जाता है।
  • प्रत्यय स्वयं स्वतंत्र शब्द नहीं होता।
  • प्रत्यय का अपना अलग अर्थ नहीं होता।
  • प्रत्यय जुड़ने पर नया शब्द बनता है या मूल शब्द के अर्थ में परिवर्तन होता है।
  • प्रत्यय शब्द-रचना (Word Formation) का महत्वपूर्ण साधन है।
  • हिंदी तथा संस्कृत दोनों भाषाओं में प्रत्ययों का व्यापक प्रयोग होता है।

ध्यान दें: यदि कोई शब्दांश किसी शब्द के आरंभ में जुड़ता है, तो वह उपसर्ग कहलाता है, जबकि यदि वही शब्दांश अंत में जुड़ता है, तो उसे प्रत्यय कहा जाता है। यही दोनों के बीच का सबसे मूलभूत अंतर है।

प्रत्यय की विशेषताएँ

प्रत्यय हिंदी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण अंग है। इसकी कुछ ऐसी विशेषताएँ हैं, जिनके आधार पर इसे अन्य व्याकरणिक तत्वों से अलग पहचाना जा सकता है। यदि विद्यार्थी इन विशेषताओं को अच्छी तरह समझ लें, तो प्रत्यय की पहचान करना और उसके प्रयोग को समझना बहुत आसान हो जाता है।

1. प्रत्यय हमेशा शब्द के अंत में जुड़ता है

प्रत्यय की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह किसी भी मूल शब्द (प्रकृति) के अंत में लगाया जाता है। यही कारण है कि इसे प्रत्यय अर्थात् 'पीछे लगने वाला' कहा जाता है।

उदाहरण:

  • सुंदर + ता = सुंदरता
  • बाल + क = बालक
  • मित्र + ता = मित्रता
  • मीठा + आस = मिठास

2. प्रत्यय का स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता

प्रत्यय स्वयं कोई स्वतंत्र शब्द नहीं होता। इसका प्रयोग अकेले नहीं किया जा सकता। यह केवल किसी मूल शब्द के साथ जुड़कर ही अर्थपूर्ण शब्द बनाता है।

उदाहरण:

  • ता अकेले अर्थपूर्ण शब्द नहीं है, लेकिन सुंदर + ता = सुंदरता बन जाता है।
  • पन अकेले अर्थ नहीं देता, लेकिन अपना + पन = अपनापन बन जाता है।

3. प्रत्यय नया शब्द बनाता है

प्रत्यय जुड़ने पर प्रायः नया शब्द बनता है, जिसका अर्थ मूल शब्द से भिन्न या विस्तृत हो सकता है।

उदाहरण:

मूल शब्द प्रत्यय नया शब्द
मानव ता मानवता
देव त्व देवत्व
बाल बालक
अपना पन अपनापन

4. प्रत्यय शब्द के अर्थ में परिवर्तन कर देता है

कई बार प्रत्यय केवल नया शब्द ही नहीं बनाता, बल्कि मूल शब्द के अर्थ में भी परिवर्तन या विस्तार कर देता है।

उदाहरण:

  • मित्र → मित्रता (मित्र होने का भाव)
  • सुंदर → सुंदरता (सुंदर होने का गुण)
  • मीठा → मिठास (मीठेपन का भाव)

5. प्रत्यय शब्द-रचना का महत्वपूर्ण साधन है

हिंदी भाषा में हजारों शब्द प्रत्ययों की सहायता से बनाए जाते हैं। इसलिए शब्द-निर्माण (Word Formation) में प्रत्यय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

उदाहरण:

  • ज्ञानी → ज्ञानीपन
  • मधुर → मधुरता
  • दयालु → दयालुता
  • बुद्धि → बौद्धिक

6. एक ही प्रत्यय अनेक शब्दों के साथ लग सकता है

एक प्रत्यय कई अलग-अलग शब्दों के साथ जुड़कर अनेक नए शब्द बना सकता है।

उदाहरण:

  • ता → मानवता, मित्रता, सुंदरता, सरलता, मधुरता
  • पन → बचपन, बड़प्पन, अपनापन

7. सभी प्रत्यय समान कार्य नहीं करते

कुछ प्रत्यय संज्ञा बनाते हैं, कुछ विशेषण, जबकि कुछ अन्य प्रकार के शब्दों का निर्माण करते हैं। इसलिए प्रत्ययों के कार्य भी अलग-अलग होते हैं।

उदाहरण:

  • मित्र + ता = मित्रता (संज्ञा)
  • विद्या + अर्थी = विद्यार्थी (संज्ञा)
  • बाल + क = बालक (संज्ञा)

याद रखें

यदि किसी शब्द के अंत में कोई शब्दांश जुड़कर नया शब्द बनाए, तो वह प्रत्यय कहलाता है। यदि वही शब्दांश शब्द के आरंभ में जुड़ता है, तो वह उपसर्ग कहलाता है। प्रत्यय की पहचान करने का सबसे सरल तरीका यही है कि यह हमेशा शब्द के अंत में लगाया जाता है।

प्रत्यय के प्रमुख भेद

हिंदी व्याकरण में प्रत्ययों का वर्गीकरण उनके कार्य और प्रयोग के आधार पर किया जाता है। सामान्यतः प्रत्यय दो प्रमुख प्रकार के माने जाते हैं। इन दोनों की सहायता से हिंदी तथा संस्कृत में असंख्य नए शब्दों का निर्माण होता है।

प्रत्यय के दो प्रमुख भेद निम्नलिखित हैं—

  1. कृत प्रत्यय
  2. तद्धित प्रत्यय

दोनों प्रकार के प्रत्ययों का कार्य अलग-अलग होता है। कृत प्रत्यय मुख्य रूप से धातु के साथ जुड़ते हैं, जबकि तद्धित प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि शब्दों के साथ जुड़कर नए शब्दों का निर्माण करते हैं।

आधार कृत प्रत्यय तद्धित प्रत्यय
किसके साथ जुड़ता है? धातु के साथ संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि के साथ
मुख्य कार्य नए शब्दों का निर्माण नए शब्द एवं नए अर्थ का निर्माण
उदाहरण पढ़ + आक = पाठक मित्र + ता = मित्रता

प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर कृत प्रत्यय और तद्धित प्रत्यय के बीच अंतर पूछा जाता है। इसलिए दोनों के आधार, प्रयोग और उदाहरणों को अच्छी तरह समझना आवश्यक है।

1. कृत प्रत्यय

जो प्रत्यय धातु के अंत में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं, उन्हें कृत प्रत्यय कहा जाता है। कृत प्रत्ययों से बनने वाले शब्दों को कृदन्त कहा जाता है।

उदाहरण:

  • पढ़ + आक = पाठक
  • लिख + अक = लेखक
  • गा + क = गायक

कृत प्रत्ययों का विस्तृत अध्ययन अगले अनुभाग "कृत प्रत्यय" में किया जाएगा।

2. तद्धित प्रत्यय

जो प्रत्यय धातु के अतिरिक्त संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि शब्दों के अंत में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं, उन्हें तद्धित प्रत्यय कहा जाता है।

उदाहरण:

  • मित्र + ता = मित्रता
  • बाल + पन = बचपन
  • सुंदर + ता = सुंदरता

तद्धित प्रत्ययों का विस्तृत अध्ययन आगे "तद्धित प्रत्यय" शीर्षक के अंतर्गत किया जाएगा।

एक नजर में

  • प्रत्यय के दो प्रमुख भेद हैं— कृत प्रत्यय और तद्धित प्रत्यय
  • कृत प्रत्यय धातु के साथ जुड़ते हैं।
  • तद्धित प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि शब्दों के साथ जुड़ते हैं।
  • दोनों प्रकार के प्रत्ययों का उद्देश्य नए शब्दों का निर्माण करना है।

तद्धित प्रत्यय के प्रमुख भेद

तद्धित प्रत्ययों का वर्गीकरण उनके द्वारा व्यक्त किए जाने वाले अर्थ के आधार पर किया जाता है। तद्धित प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि शब्दों के अंत में जुड़कर नए शब्दों का निर्माण करते हैं। इनसे बनने वाले शब्दों का अर्थ मूल शब्द की अपेक्षा अधिक स्पष्ट, विस्तृत अथवा विशिष्ट हो जाता है।

आधुनिक हिंदी व्याकरण में तद्धित प्रत्ययों के प्रमुख भेद निम्नलिखित माने जाते हैं—

  1. कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय
  2. भाववाचक तद्धित प्रत्यय
  3. अपत्यवाचक तद्धित प्रत्यय
  4. ऊनवाचक तद्धित प्रत्यय
  5. गुणवाचक तद्धित प्रत्यय

आइए अब प्रत्येक भेद को उदाहरण सहित समझते हैं।


1. कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय

जो तद्धित प्रत्यय किसी व्यवसाय, कार्य या कार्य करने वाले व्यक्ति का बोध कराते हैं, उन्हें कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं।

मूल शब्द प्रत्यय निर्मित शब्द
सोना आर सोनार
लोहा आर लोहार
जादू गर जादूगर
कला कार कलाकार

इन उदाहरणों में बने शब्द किसी कार्य या व्यवसाय से जुड़े व्यक्ति का बोध कराते हैं।


2. भाववाचक तद्धित प्रत्यय

जो तद्धित प्रत्यय किसी भाव, गुण, अवस्था अथवा धर्म का बोध कराते हैं, उन्हें भाववाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं।

मूल शब्द प्रत्यय निर्मित शब्द
मित्र ता मित्रता
मानव ता मानवता
सुन्दर ता सुन्दरता
मीठा आस मिठास
बड़ा प्पन बड़प्पन

इन शब्दों में किसी गुण, अवस्था या भाव का बोध हो रहा है, इसलिए ये भाववाचक तद्धित प्रत्यय के उदाहरण हैं।

3. अपत्यवाचक तद्धित प्रत्यय

जो तद्धित प्रत्यय संतान, वंश, कुल अथवा गोत्र का बोध कराते हैं, उन्हें अपत्यवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं। संस्कृत तथा हिंदी में ऐसे अनेक शब्द प्रचलित हैं, जिनसे किसी व्यक्ति के वंश या संतान का बोध होता है।

मूल शब्द प्रत्यय निर्मित शब्द
वसुदेव वासुदेव
मनु मानव
कुरु कौरव
पाण्डु पाण्डव
रघु राघव
राधा एय राधेय
कुन्ती एय कौन्तेय
दिति दैत्य

इन सभी शब्दों में किसी व्यक्ति की संतान, वंश या कुल का बोध हो रहा है। इसलिए ये अपत्यवाचक तद्धित प्रत्यय के उदाहरण हैं।


4. ऊनवाचक तद्धित प्रत्यय

जो तद्धित प्रत्यय किसी वस्तु के छोटे रूप, लघुता, हीनता अथवा स्नेहसूचक रूप का बोध कराते हैं, उन्हें ऊनवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं।

मूल शब्द प्रत्यय निर्मित शब्द
खाट इया खटिया
कोठ री कोठरी
लोटा इया लुटिया
ढोल ढोलक
छाता री छतरी

इन उदाहरणों में मूल शब्द की अपेक्षा छोटा, लघु या परिवर्तित रूप व्यक्त हो रहा है। इसलिए ये ऊनवाचक तद्धित प्रत्यय के उदाहरण हैं।


5. गुणवाचक तद्धित प्रत्यय

जो तद्धित प्रत्यय किसी गुण, स्वभाव, विशेषता अथवा धर्म का बोध कराते हैं, उन्हें गुणवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं।

मूल शब्द प्रत्यय निर्मित शब्द
बुद्धि वान बुद्धिवान
गुण वान गुणवान
धर्म इक धार्मिक
समाज इक सामाजिक
राष्ट्र ईय राष्ट्रीय

इन शब्दों में किसी व्यक्ति या वस्तु के गुण, धर्म अथवा विशेषता का बोध हो रहा है। इसलिए ये गुणवाचक तद्धित प्रत्यय के उदाहरण हैं।

एक नजर में

  • कर्तृवाचक – कार्य या व्यवसाय करने वाले का बोध कराते हैं।
  • भाववाचक – भाव, गुण या अवस्था का बोध कराते हैं।
  • अपत्यवाचक – संतान, वंश या कुल का बोध कराते हैं।
  • ऊनवाचक – लघुता, छोटे रूप या हीनता का बोध कराते हैं।
  • गुणवाचक – गुण, धर्म या विशेषता का बोध कराते हैं।

अब आपने तद्धित प्रत्यय के प्रमुख भेदों का अध्ययन कर लिया। आगे हम हिंदी के प्रमुख प्रत्ययों तथा उनके महत्वपूर्ण उदाहरणों को विस्तार से समझेंगे।

हिंदी के प्रमुख प्रत्यय

हिंदी भाषा में अनेक ऐसे प्रत्यय प्रचलित हैं जिनकी सहायता से नए-नए शब्दों का निर्माण किया जाता है। किसी एक प्रत्यय का प्रयोग अनेक शब्दों के साथ किया जा सकता है। नीचे कुछ प्रमुख प्रत्ययों तथा उनके उदाहरणों को सारणीबद्ध रूप में प्रस्तुत किया गया है।

प्रत्यय उदाहरण निर्मित शब्द
ता मित्र + ता मित्रता
ता मानव + ता मानवता
पन बच्चा + पन बचपन
प्पन बड़ा + प्पन बड़प्पन
आस मीठा + आस मिठास
आई पढ़ + आई पढ़ाई
आवट लिख + आवट लिखावट
आन उड़ + आन उड़ान
आहट घबरा + आहट घबराहट
गर जादू + गर जादूगर
कार कला + कार कलाकार
वान गुण + वान गुणवान
ईय राष्ट्र + ईय राष्ट्रीय
इक धर्म + इक धार्मिक

प्रमुख प्रत्ययों को याद रखने की सरल विधि

प्रत्ययों को अलग-अलग याद करने के बजाय उनके प्रयोग के आधार पर याद करना अधिक लाभदायक होता है। उदाहरण के लिए –ता, –पन, –आस प्रायः भाववाचक शब्द बनाते हैं, जबकि –गर, –कार, –वान जैसे प्रत्यय किसी व्यक्ति, गुण अथवा व्यवसाय का बोध कराते हैं। इसी प्रकार –आई, –आवट, –आन और –आहट से बने शब्द प्रायः किसी क्रिया, भाव या अवस्था का बोध कराते हैं।

यदि विद्यार्थी प्रत्ययों को इस प्रकार समूहों में याद करें, तो उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी परीक्षाओं में प्रश्न हल करने में अधिक सुविधा होती है।

प्रत्यय की पहचान कैसे करें?

प्रत्यय से संबंधित प्रश्न लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। इसलिए केवल प्रत्यय की परिभाषा याद रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसी शब्द में प्रत्यय की सही पहचान करना भी आवश्यक है। नीचे दिए गए सरल नियमों की सहायता से आप किसी भी शब्द में प्रत्यय को आसानी से पहचान सकते हैं।

1. सबसे पहले मूल शब्द (प्रकृति) पहचानें

किसी भी शब्द में प्रत्यय पहचानने के लिए पहले यह देखें कि उसका मूल शब्द कौन-सा है। इसके बाद यह समझने का प्रयास करें कि अंत में कौन-सा भाग जुड़कर नया शब्द बना रहा है।

उदाहरण:

निर्मित शब्द मूल शब्द प्रत्यय
मित्रता मित्र ता
मानवता मानव ता
मिठास मीठा आस
बड़प्पन बड़ा प्पन
घबराहट घबरा आहट

2. देखें कि प्रत्यय शब्द के अंत में जुड़ा है या नहीं

प्रत्यय की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह हमेशा शब्द के अंत में जुड़ता है। यदि कोई शब्दांश शब्द के आरंभ में जुड़ा है, तो वह प्रत्यय नहीं बल्कि उपसर्ग होगा।

उदाहरण:

  • मित्र + ता = मित्रता (प्रत्यय)
  • बड़ा + प्पन = बड़प्पन (प्रत्यय)
  • + न्याय = अन्याय (उपसर्ग)
  • दुर् + व्यवहार = दुर्व्यवहार (उपसर्ग)

3. देखें कि नया शब्द बना है या नहीं

यदि किसी शब्द के अंत में कोई शब्दांश जुड़ने से नया अर्थपूर्ण शब्द बन रहा है, तो वह शब्दांश प्रत्यय कहलाएगा।

उदाहरण:

  • सुन्दर → सुन्दरता
  • मानव → मानवता
  • गुण → गुणवान
  • कला → कलाकार

4. धातु और सामान्य शब्द में अंतर समझें

यदि प्रत्यय धातु के साथ जुड़ता है, तो वह कृत प्रत्यय होता है। यदि प्रत्यय धातु के अतिरिक्त संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि शब्दों के साथ जुड़ता है, तो वह तद्धित प्रत्यय कहलाता है।

शब्द प्रकार कारण
पढ़ाई कृत प्रत्यय धातु "पढ़" से बना है।
मित्रता तद्धित प्रत्यय संज्ञा "मित्र" से बना है।
मानवता तद्धित प्रत्यय संज्ञा "मानव" से बना है।

प्रत्यय पहचानने का आसान सूत्र

मूल शब्द + प्रत्यय = नया शब्द

यदि किसी शब्द के अंत में कोई वर्ण या वर्ण-समूह जुड़कर नया शब्द बना रहा है, तो वह प्रत्यय है। इसी सरल नियम की सहायता से अधिकांश प्रश्नों का सही उत्तर दिया जा सकता है।

उपसर्ग और प्रत्यय में अंतर

उपसर्ग और प्रत्यय दोनों ही शब्द-रचना के महत्वपूर्ण अंग हैं। दोनों के माध्यम से नए शब्दों का निर्माण होता है, किंतु इनके प्रयोग, स्थान तथा कार्य में पर्याप्त अंतर होता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इन दोनों के बीच का अंतर अक्सर पूछा जाता है। इसलिए इनके प्रमुख अंतरों को समझना आवश्यक है।

आधार उपसर्ग प्रत्यय
अर्थ जो शब्दांश किसी शब्द के आरंभ में जुड़ता है। जो शब्दांश किसी शब्द के अंत में जुड़ता है।
स्थान शब्द के पहले लगाया जाता है। शब्द के बाद लगाया जाता है।
कार्य शब्द के अर्थ में परिवर्तन या विशेषता उत्पन्न करता है। नया शब्द बनाता है या शब्द के अर्थ में परिवर्तन करता है।
निर्माण का आधार मूल शब्द के पहले जुड़ता है। मूल शब्द के अंत में जुड़ता है।
उदाहरण अ + न्याय = अन्याय मित्र + ता = मित्रता
एक अन्य उदाहरण दुर् + व्यवहार = दुर्व्यवहार मीठा + आस = मिठास
स्वतंत्र प्रयोग उपसर्ग का स्वतंत्र प्रयोग नहीं होता। प्रत्यय का भी स्वतंत्र प्रयोग नहीं होता।
मुख्य उद्देश्य शब्द के अर्थ में परिवर्तन या विस्तार करना। नए शब्दों का निर्माण करना तथा अर्थ में परिवर्तन करना।

उदाहरण द्वारा अंतर समझें

उपसर्ग का उदाहरण

  • अ + धर्म = अधर्म
  • सु + पुत्र = सुपुत्र
  • निर् + दोष = निर्दोष

प्रत्यय का उदाहरण

  • मित्र + ता = मित्रता
  • गुण + वान = गुणवान
  • कला + कार = कलाकार

याद रखने की सरल ट्रिक

जो पहले लगे वह उपसर्ग, जो बाद में लगे वह प्रत्यय।

यदि किसी शब्द के आरंभ में कोई शब्दांश जुड़ता है, तो वह उपसर्ग कहलाता है। यदि वही शब्दांश अंत में जुड़ता है, तो वह प्रत्यय कहलाता है। यही दोनों के बीच का सबसे महत्वपूर्ण अंतर है।

प्रत्यय से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQ)

प्रत्यय से संबंधित अनेक प्रश्न विद्यालयी परीक्षाओं तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। नीचे प्रत्यय से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर सरल भाषा में दिए गए हैं।

1. प्रत्यय किसे कहते हैं?

जो वर्ण, अक्षर अथवा वर्णों का समूह किसी शब्द के अंत में जुड़कर नया शब्द बनाता है या उसके अर्थ में परिवर्तन करता है, उसे प्रत्यय कहते हैं।

2. प्रत्यय कितने प्रकार के होते हैं?

हिंदी व्याकरण में प्रत्यय के दो प्रमुख प्रकार माने जाते हैं—

  • कृत प्रत्यय
  • तद्धित प्रत्यय

3. कृत प्रत्यय किसे कहते हैं?

जो प्रत्यय धातु के अंत में जुड़कर नए शब्दों का निर्माण करते हैं, उन्हें कृत प्रत्यय कहते हैं।

4. तद्धित प्रत्यय किसे कहते हैं?

जो प्रत्यय धातु के अतिरिक्त संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि शब्दों के अंत में जुड़कर नए शब्दों का निर्माण करते हैं, उन्हें तद्धित प्रत्यय कहते हैं।

5. प्रत्यय की पहचान कैसे करें?

यदि किसी शब्द के अंत में कोई शब्दांश जुड़कर नया शब्द बना रहा है, तो वह शब्दांश प्रत्यय कहलाता है।

6. उपसर्ग और प्रत्यय में क्या अंतर है?

उपसर्ग शब्द के आरंभ में जुड़ता है, जबकि प्रत्यय शब्द के अंत में जुड़ता है।

7. प्रत्यय के पाँच उदाहरण लिखिए।

  • मित्र + ता = मित्रता
  • मानव + ता = मानवता
  • बड़ा + प्पन = बड़प्पन
  • मीठा + आस = मिठास
  • कला + कार = कलाकार

8. कृत प्रत्यय और तद्धित प्रत्यय में मुख्य अंतर क्या है?

कृत प्रत्यय धातु के साथ जुड़ते हैं, जबकि तद्धित प्रत्यय धातु के अतिरिक्त अन्य शब्दों के साथ जुड़ते हैं।

9. क्या प्रत्यय का स्वतंत्र प्रयोग किया जा सकता है?

नहीं। प्रत्यय का अपना स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता। यह हमेशा किसी मूल शब्द के साथ जुड़कर ही प्रयुक्त होता है।

10. प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रत्यय से किस प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं?

प्रतियोगी परीक्षाओं में सामान्यतः निम्न प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं—

  • प्रत्यय की परिभाषा
  • प्रत्यय के भेद
  • कृत और तद्धित प्रत्यय में अंतर
  • शब्दों में प्रयुक्त प्रत्यय की पहचान
  • सही उदाहरण का चयन
  • उपसर्ग और प्रत्यय में अंतर

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

तथ्य याद रखें
प्रत्यय कहाँ जुड़ता है? शब्द के अंत में
प्रत्यय के मुख्य भेद कृत एवं तद्धित
कृत प्रत्यय किसके साथ जुड़ता है? धातु के साथ
तद्धित प्रत्यय किसके साथ जुड़ता है? धातु के अतिरिक्त अन्य शब्दों के साथ
उपसर्ग कहाँ जुड़ता है? शब्द के आरंभ में

यदि आपने इसे ध्यानपूर्वक पढ़ लिया है, तो अब आप प्रत्यय की परिभाषा, उसके भेद, पहचान, उदाहरण तथा उपसर्ग और प्रत्यय के अंतर को आसानी से समझ सकते हैं। इससे संबंधित अधिकांश प्रश्नों का उत्तर भी आप आत्मविश्वास के साथ दे सकेंगे।

संदर्भ ग्रंथ

  • डॉ. वासुदेव नंदन प्रसाद — आधुनिक हिंदी व्याकरण एवं रचना
  • NCERT हिंदी
  • हिंदी शब्दसागर

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