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समास : परिभाषा, भेद, विग्रह, पहचान, उदाहरण एवं अभ्यास प्रश्न

समास हिंदी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण विषय है। भाषा को संक्षिप्त, प्रभावशाली तथा अर्थपूर्ण बनाने के लिए दो या दो से अधिक पदों को मिलाकर एक नया सार्थक पद बनाया जाता है। इस प्रक्रिया को समास कहते हैं। समास के प्रयोग से भाषा में संक्षिप्तता, स्पष्टता और सौंदर्य का विकास होता है।

उदाहरण के लिए राजा का पुत्र के स्थान पर राजपुत्र तथा हिम का आलय के स्थान पर हिमालय शब्द का प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार अनेक शब्दों के स्थान पर एक ही सार्थक शब्द का प्रयोग करना समास कहलाता है।


समास किसे कहते हैं?

दो या दो से अधिक पदों के मेल से बने संक्षिप्त एवं सार्थक शब्द को समास कहते हैं। समास में अनेक पद मिलकर एक पद का रूप धारण कर लेते हैं तथा उनके बीच प्रयुक्त विभक्ति या संबंधसूचक शब्दों का लोप हो जाता है।

संस्कृत सूत्र

समस्यते अनेकं पदम् इति समासः।

अर्थात् जहाँ अनेक पद मिलकर एक पद बन जाते हैं, वहाँ समास होता है।


समास की परिभाषा

दो या दो से अधिक पदों के मेल से बने संक्षिप्त एवं सार्थक शब्द को समास कहते हैं।

दूसरे शब्दों में, जब दो या दो से अधिक शब्द मिलकर एक नया अर्थपूर्ण शब्द बनाते हैं और उनके बीच के संबंधसूचक शब्दों का लोप हो जाता है, तब उसे समास कहते हैं।


समास का उद्देश्य

समास का मुख्य उद्देश्य भाषा को संक्षिप्त, प्रभावशाली तथा सुगम बनाना है। समास के प्रयोग से कम शब्दों में अधिक अर्थ व्यक्त किया जा सकता है, जिससे भाषा का सौंदर्य और प्रभाव दोनों बढ़ जाते हैं।


समास के भेद

हिंदी व्याकरण में समास के निम्नलिखित छः प्रमुख भेद माने जाते हैं—

अब समास के प्रत्येक भेद का क्रमशः विस्तार से अध्ययन करते हैं।


तत्पुरुष समास

जिस समास में उत्तरपद (दूसरा पद) प्रधान होता है तथा दोनों पदों के बीच प्रयुक्त कारक-चिह्न (का, की, के, को, से, के लिए, में आदि) का लोप हो जाता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं।

तत्पुरुष समास की पहचान

यदि समास का विग्रह करने पर दोनों पदों के बीच कोई कारक-चिह्न आए, तो वह सामान्यतः तत्पुरुष समास होता है।

तत्पुरुष समास के भेद

कारक-चिह्नों के आधार पर तत्पुरुष समास के मुख्यतः छह भेद माने जाते हैं—

  1. कर्म तत्पुरुष
  2. करण तत्पुरुष
  3. संप्रदान तत्पुरुष
  4. अपादान तत्पुरुष
  5. संबंध तत्पुरुष
  6. अधिकरण तत्पुरुष
भेद कारक उदाहरण विग्रह
कर्म को ग्रामगमन ग्राम को गमन
करण से हस्तलिखित हाथ से लिखित
संप्रदान के लिए रसोईघर रसोई के लिए घर
अपादान से ऋणमुक्त ऋण से मुक्त
संबंध का/की/के राजपुत्र राजा का पुत्र
अधिकरण में/पर वनवास वन में वास

कर्मधारय समास

जिस समास में दोनों पदों का संबंध विशेषण-विशेष्य अथवा उपमान-उपमेय का होता है तथा दोनों पद मिलकर एक ही व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध कराते हैं, उसे कर्मधारय समास कहते हैं।

कर्मधारय समास की पहचान

यदि समास-विग्रह करने पर विशेषण-विशेष्य अथवा उपमान-उपमेय का संबंध स्पष्ट हो तथा समस्त पद उसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध कराए, तो वह कर्मधारय समास होता है।

उदाहरण: नीलकमल = नीला कमल। यहाँ समस्त पद का अर्थ कमल ही है, केवल उसकी विशेषता (नीला) बताई गई है। इसलिए यह कर्मधारय समास है।

उदाहरण

समस्त पद समास-विग्रह
नीलकमल नीला कमल
महापुरुष महान पुरुष
कृष्णसर्प काला सर्प
चन्द्रमुख चन्द्र के समान मुख
कमलनयन कमल के समान नयन
पीताम्बर पीला अम्बर (वस्त्र)
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण

कर्मधारय और बहुब्रीहि समास में विद्यार्थी सबसे अधिक भ्रमित होते हैं।

यदि समस्त पद उसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध कराए, तो वह कर्मधारय समास होता है।

यदि समस्त पद किसी अन्य व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध कराए, तो वह बहुब्रीहि समास होता है।

याद रखें:
नीलकमल = नीला कमल → वही कमल ⇒ कर्मधारय
नीलकण्ठ = जिसका कण्ठ नीला है (भगवान शिव) → किसी अन्य व्यक्ति का बोध ⇒ बहुब्रीहि


द्वंद्व समास

जिस समास में दोनों पद प्रधान होते हैं तथा विग्रह करने पर उनके बीच सामान्यतः 'और', 'एवं', 'तथा' आदि शब्द आते हैं, उसे द्वंद्व समास कहते हैं।

द्वंद्व समास की पहचान

यदि समास-विग्रह करने पर दोनों पदों के बीच 'और' या 'एवं' आए तथा दोनों पद समान रूप से प्रधान हों, तो वह द्वंद्व समास होता है।

समस्त पद विग्रह
माता-पिता माता और पिता
दिन-रात दिन और रात
सुख-दुःख सुख और दुःख
राम-लक्ष्मण राम और लक्ष्मण

द्विगु समास

जिस समास का पूर्वपद संख्यावाचक विशेषण हो तथा समस्त पद किसी समूह, समाहार अथवा समुदाय का बोध कराए, उसे द्विगु समास कहते हैं।

दूसरे शब्दों में, जब पहला पद किसी संख्या को व्यक्त करता है और पूरा समस्त पद उसी संख्या से संबंधित समूह या समुदाय का अर्थ देता है, तब वहाँ द्विगु समास होता है।

द्विगु समास की पहचान
  • पहला पद सदैव संख्यावाचक होता है।
  • समस्त पद किसी समूह, समाहार या समुदाय का बोध कराता है।
  • विग्रह करने पर सामान्यतः "...का समूह", "...का समाहार" अथवा "...का समुदाय" जैसा अर्थ निकलता है।

उदाहरण

समस्त पद समास-विग्रह
नवरत्न नौ रत्नों का समूह
त्रिलोक तीनों लोकों का समाहार
सप्तऋषि सात ऋषियों का समूह
पंचवटी पाँच वट वृक्षों का समूह
चौराहा चार राहों का मिलन-स्थान
ध्यान दें

केवल पहले पद का संख्यावाचक होना पर्याप्त नहीं है। समस्त पद से समूह, समाहार या समुदाय का बोध भी होना चाहिए। यही द्विगु समास की सबसे महत्वपूर्ण पहचान है।


द्विगु समास की पहचान

यदि पहला पद संख्या बताए और पूरे शब्द से समूह या समाहार का अर्थ निकले, तो वह द्विगु समास होता है।

समस्त पद विग्रह
नवरत्न नौ रत्नों का समूह
त्रिलोक तीन लोकों का समाहार
सप्तऋषि सात ऋषियों का समूह


बहुब्रीहि समास

जिस समास में कोई भी पद प्रधान नहीं होता, बल्कि समस्त पद अपने दोनों पदों से भिन्न किसी अन्य व्यक्ति, वस्तु, स्थान या विशेषता का बोध कराता है, उसे बहुब्रीहि समास कहते हैं।

अर्थात् बहुब्रीहि समास में समस्त पद का अर्थ उसके पदों तक सीमित न रहकर किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु पर लागू होता है। इसी कारण इसे अन्यपदप्रधान समास भी कहा जाता है।

बहुब्रीहि समास की पहचान
  • समस्त पद का अर्थ उसके दोनों पदों से भिन्न किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु का बोध कराता है।
  • समास-विग्रह करने पर सामान्यतः "जिसका...", "जिसके...", "जिसमें..." अथवा "वाला" जैसे शब्द आते हैं।
  • बहुव्रीहि समास का दोनों में से कोई भी पद प्रधान नहीं होता। अन्य पद की प्रधानता होती है।

इसे सरलता से समझें

दशानन का शाब्दिक अर्थ केवल दस मुख नहीं है, बल्कि जिसके दस मुख हैं, अर्थात रावण है। यहाँ समस्त पद का अर्थ न तो केवल दश है और न ही केवल आनन, बल्कि दोनों से भिन्न रावण है। यही बहुब्रीहि समास की सबसे महत्वपूर्ण पहचान है।

उदाहरण

समस्त पद समास-विग्रह अर्थ
दशानन जिसके दस आनन (मुख) हैं रावण
चतुर्भुज जिसकी चार भुजाएँ हैं भगवान विष्णु
नीलकण्ठ जिसका कण्ठ नीला है भगवान शिव
लम्बोदर जिसका उदर लम्बा है भगवान गणेश
त्रिलोचन जिसके तीन नेत्र हैं भगवान शिव
कर्मधारय और बहुब्रीहि में अंतर

यदि समस्त पद उसी व्यक्ति या वस्तु का बोध कराए, तो सामान्यतः कर्मधारय समास होता है। लेकिन यदि समस्त पद किसी अन्य व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध कराए, तो वह बहुब्रीहि समास कहलाता है।

महत्वपूर्ण नोट

कई शब्दों के समास-भेद के संबंध में विभिन्न व्याकरणाचार्यों के मत भिन्न मिलते हैं। विशेषकर बहुव्रीहि और द्विगु में। ऐसी स्थिति में लोक में सर्वाधिक प्रचलित एवं मान्य अर्थ के आधार पर समास का निर्णय किया जाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सामान्यतः इसी मान्य अर्थ को स्वीकार किया जाता है। जैसे दशानन द्विगु समास भी हो सकता है लेकिन लोक में रावण अर्थ अधिक प्रचलित और मान्य होने के कारण बहुव्रीहि समास होगा।


अव्ययीभाव समास

जिस समास का पूर्वपद अव्यय होता है तथा समस्त पद का प्रयोग भी अव्यय के रूप में किया जाता है, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं।

दूसरे शब्दों में, जब किसी समास का पहला पद अव्यय हो और उसके कारण समस्त पद का रूप लिंग, वचन, पुरुष या कारक के अनुसार न बदले, तब वहाँ अव्ययीभाव समास होता है।

अव्यय क्या है?

अव्यय वे शब्द होते हैं जिनके रूप में लिंग, वचन, पुरुष अथवा कारक के अनुसार कोई परिवर्तन नहीं होता। जैसे— यथा, प्रति, भर, अनु, सह, उप आदि।

इसे ऐसे समझें

प्रतिदिन शब्द में प्रति अव्यय है। इसका अर्थ है प्रत्येक दिन। इसी प्रकार यथाशक्ति का अर्थ है शक्ति के अनुसार तथा भरपेट का अर्थ है पेट भरकर। इन सभी शब्दों में पहला पद अव्यय है, इसलिए ये अव्ययीभाव समास कहलाते हैं।

अव्ययीभाव समास की पहचान
  • पहला पद अव्यय होता है।
  • समस्त पद का प्रयोग भी सामान्यतः अव्यय के रूप में होता है।
  • विग्रह करने पर प्रायः "प्रत्येक", "के अनुसार", "भरकर", "तक", "सहित" आदि अर्थ प्राप्त होते हैं।

उदाहरण

समस्त पद समास-विग्रह
प्रतिदिन प्रत्येक दिन
यथाशक्ति शक्ति के अनुसार
भरपेट पेट भरकर
आजीवन जीवन भर
यथासंभव संभव के अनुसार
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण

अव्ययीभाव समास की सबसे बड़ी पहचान यह है कि इसका पूर्वपद अव्यय होता है और समस्त पद का प्रयोग भी सामान्यतः अव्यय के रूप में किया जाता है।

एक वाक्य में याद रखें

पूर्वपद अव्यय + समस्त पद अव्यय = अव्ययीभाव समास


समास-विग्रह

समास-विग्रह का अर्थ है समस्त पद को उसके मूल पदों में विभाजित करके उनके बीच के संबंध को स्पष्ट करना। दूसरे शब्दों में, समास से बने शब्द को उसके मूल रूप में लिखना समास-विग्रह कहलाता है।

समास-विग्रह करने की विधि
  1. समस्त पद के दोनों मूल पदों की पहचान कीजिए।
  2. दोनों पदों के बीच छिपे हुए संबंध को समझिए।
  3. आवश्यक कारक-चिह्न, 'और', 'के समान', 'वाला', 'प्रत्येक' आदि शब्द जोड़कर पूरा विग्रह लिखिए।

उदाहरण

समस्त पद समास-विग्रह
राजपुत्र राजा का पुत्र
नीलकमल नीला कमल
माता-पिता माता और पिता
दशानन दस आनन वाला
प्रतिदिन प्रत्येक दिन

समास की पहचान

किसी समस्त पद का सही समास पहचानने के लिए निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए—

  • यदि कारक-चिह्न का लोप हो तो तत्पुरुष हो सकता है।
  • यदि दोनों पद समान रूप से प्रधान हों और विग्रह में 'और' आए तो द्वंद्व होता है।
  • यदि पहला पद संख्यावाचक हो और समूह का बोध कराए तो द्विगु होता है।
  • यदि विशेषण-विशेष्य अथवा उपमान-उपमेय का संबंध हो तो कर्मधारय होता है।
  • यदि समस्त पद किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु का बोध कराए तो बहुब्रीहि होता है।
  • यदि पहला पद अव्यय हो तो अव्ययीभाव होता है।

समास और संधि में अंतर

आधार समास संधि
अर्थ दो या दो से अधिक पद मिलकर एक पद बनाते हैं। दो वर्णों के मेल से ध्वनि-परिवर्तन होता है।
विग्रह समास-विग्रह किया जाता है। संधि-विच्छेद किया जाता है।
उदाहरण राजपुत्र, नीलकमल विद्यालय, सदैव

समास के छहों भेद एक दृष्टि में

समास प्रधान पद पहचान
तत्पुरुष उत्तरपद कारक-चिह्न का लोप
कर्मधारय दोनों एक ही वस्तु का बोध विशेषण-विशेष्य संबंध
द्वंद्व दोनों पद 'और' का बोध
द्विगु समूह पहला पद संख्यावाचक
बहुब्रीहि कोई पद प्रधान नहीं अन्य व्यक्ति/वस्तु का बोध
अव्ययीभाव पूर्वपद पूर्वपद अव्यय

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

  • हिंदी व्याकरण में समास के छह प्रमुख भेद माने जाते हैं।
  • तत्पुरुष समास के छह उपभेद होते हैं।
  • द्वंद्व समास में दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं।
  • बहुब्रीहि समास में कोई भी पद प्रधान नहीं होता।
  • समास का विग्रह तथा संधि का विच्छेद किया जाता है।

अभ्यास प्रश्न

  1. समास किसे कहते हैं? इसकी परिभाषा लिखिए।
  2. समास का मुख्य उद्देश्य क्या है?
  3. समास के कितने भेद होते हैं? उनके नाम लिखिए।
  4. तत्पुरुष समास की पहचान उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
  5. कर्मधारय समास और बहुब्रीहि समास में अंतर लिखिए।
  6. द्वंद्व समास तथा द्विगु समास में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  7. समास और संधि में क्या अंतर है?
  8. निम्नलिखित समस्त पदों का समास-विग्रह कीजिए—
    • राजपुत्र
    • नीलकमल
    • दशानन
    • प्रतिदिन
    • माता-पिता
  9. निम्नलिखित समासों का भेद बताइए—
    • राजपुत्र
    • महापुरुष
    • सुख-दुःख
    • नवरत्न
    • चतुर्भुज
    • यथाशक्ति
  10. उदाहरण सहित किसी भी चार समासों का वर्णन कीजिए।

समास हिंदी व्याकरण का अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। इसके माध्यम से भाषा अधिक संक्षिप्त, प्रभावशाली एवं अर्थपूर्ण बनती है। समास के भेद, उनकी पहचान, समास-विग्रह तथा उनके सही प्रयोग का नियमित अभ्यास करने से व्याकरण की समझ और भाषा की शुद्धता दोनों में वृद्धि होती है।


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