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उपसर्ग किसे कहते हैं? परिभाषा, अर्थ, प्रकार, उदाहरण एवं 20 प्रमुख उपसर्ग

उपसर्ग किसे कहते हैं? (अर्थ, परिभाषा एवं परिचय)

हिंदी व्याकरण में उपसर्ग ऐसे शब्दांश होते हैं, जो किसी मूल शब्द या धातु के पूर्व (आरंभ) में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन, विस्तार अथवा विशेषता उत्पन्न करते हैं। उपसर्ग स्वयं स्वतंत्र शब्द नहीं होते, इसलिए इनका अकेले प्रयोग नहीं किया जाता। इनका वास्तविक अर्थ तभी स्पष्ट होता है, जब ये किसी मूल शब्द के साथ मिलकर नया शब्द बनाते हैं।

उदाहरण के लिए हार एक स्वतंत्र शब्द है। इसके पहले अलग-अलग उपसर्ग लगाने पर नए शब्द बनते हैं, जैसे— प्रहार, आहार तथा विहार। इन तीनों शब्दों में मूल शब्द समान है, किंतु उपसर्ग बदलने से प्रत्येक शब्द का अर्थ भी बदल गया है। यही उपसर्ग की सबसे प्रमुख विशेषता है।

उपसर्ग का अर्थ

उपसर्ग शब्द 'उप' तथा 'सर्ग' दो शब्दों के योग से बना है।

  • उप = समीप, पास, निकट
  • सर्ग = सृष्टि, निर्माण अथवा उत्पत्ति

अर्थात् जो किसी शब्द के पहले आकर उसके अर्थ का नया निर्माण करे अथवा उसमें परिवर्तन उत्पन्न करे, उसे उपसर्ग कहते हैं।

उपसर्ग की परिभाषाएँ

संस्कृत एवं हिंदी व्याकरण के अनेक विद्वानों ने उपसर्ग की परिभाषा दी है। शब्दों में थोड़ा अंतर होने पर भी सभी का मूल भाव एक ही है कि उपसर्ग शब्द के पूर्व जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन करता है।

पाणिनि ने 'अष्टाध्यायी' में उपसर्गों का उल्लेख करते हुए इन्हें धातु के पूर्व प्रयुक्त होने वाला माना है। प्रसिद्ध सूत्र है— “उपसर्गाः क्रियायोगे।” अर्थात् उपसर्ग क्रिया (धातु) के साथ योग होने पर विशेष अर्थ का बोध कराते हैं।

सिद्धान्तकौमुदी के अनुसार उपसर्ग धातु अथवा शब्द के पूर्व जुड़कर उसके अर्थ में विशेषता उत्पन्न करते हैं।

आधुनिक हिंदी व्याकरण के अनुसार जो शब्दांश किसी शब्द के पूर्व जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन या विशेषता उत्पन्न करे, उसे उपसर्ग कहते हैं।

सरल परिभाषा

ऐसे शब्दांश जो किसी मूल शब्द या धातु के पहले जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन, विस्तार अथवा विशेषता उत्पन्न करते हैं, उन्हें उपसर्ग कहते हैं।

उपसर्ग की विशेषताएँ

  • उपसर्ग सदैव किसी शब्द या धातु के पहले लगाया जाता है।
  • उपसर्ग स्वतंत्र शब्द नहीं होता, बल्कि शब्दांश होता है।
  • उपसर्ग जुड़ने पर मूल शब्द का अर्थ बदल सकता है, विस्तृत हो सकता है या उसमें नई विशेषता आ सकती है।
  • एक ही मूल शब्द के साथ अलग-अलग उपसर्ग लगाकर अनेक नए शब्द बनाए जा सकते हैं।
  • हिंदी में संस्कृत, हिंदी तथा विदेशी भाषाओं से आए अनेक उपसर्ग प्रचलित हैं।

उपसर्ग के मुख्य कार्य

उपसर्ग केवल नया शब्द बनाने का कार्य ही नहीं करते, बल्कि शब्द के अर्थ को भी प्रभावित करते हैं। सामान्यतः इनके निम्नलिखित कार्य माने जाते हैं—

  1. अर्थ में परिवर्तन करना
    उदाहरण : हार → प्रहार
  2. अर्थ में विशेषता या विस्तार उत्पन्न करना
    उदाहरण : बल → प्रबल
  3. अर्थ को विपरीत बनाना
    उदाहरण : सत्य → असत्य
  4. नए शब्दों का निर्माण करना
    उदाहरण : गमन → आगमन, उपगमन, परिगमन
ध्यान दें : प्रत्येक शब्द के प्रारंभ में दिखाई देने वाला अंश उपसर्ग नहीं होता। किसी शब्द में उपसर्ग तभी माना जाएगा, जब उसे हटाने पर शेष मूल शब्द या धातु का अस्तित्व तथा अर्थ स्पष्ट हो।

उपसर्गों का वर्गीकरण

उत्पत्ति (Origin) के आधार पर हिंदी भाषा में प्रचलित उपसर्गों को मुख्यतः तीन वर्गों में विभाजित किया जाता है।

  1. संस्कृत के उपसर्ग
  2. हिंदी के उपसर्ग
  3. विदेशी भाषाओं से आए उपसर्ग

प्रतियोगी परीक्षाओं में सामान्यतः इसी वर्गीकरण के आधार पर प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए तीनों वर्गों का अध्ययन आवश्यक है।


1. संस्कृत के उपसर्ग

संस्कृत भाषा से हिंदी में अनेक उपसर्ग आए हैं। ये आज भी हिंदी के तत्सम एवं तद्भव शब्दों में व्यापक रूप से प्रयुक्त होते हैं। नीचे प्रमुख संस्कृत उपसर्ग उनके सामान्य अर्थ तथा उदाहरण सहित दिए जा रहे हैं।

उपसर्ग सामान्य अर्थ उदाहरण
अतिअधिक, सीमा से परेअत्याचार, अत्यधिक
अधिऊपर, श्रेष्ठअधिकार, अध्यक्ष
अनुपीछे, अनुसरणअनुकरण, अनुज
अपहीन, दोषयुक्तअपमान, अपयश
अभिसामने, ओरअभिमान, अभिनय
अवनीचे, पतनअवनति, अवगुण
तक, सहितआगमन, आजीवन
उद् (उत्)ऊपर, उत्कर्षउद्गम, उत्साह
उपसमीपउपकार, उपदेश
दुर्बुरा, कठिनदुर्जन, दुर्दशा
दुस्दोषयुक्तदुस्साहस, दुष्कर्म
निनीचे, भीतरनिवास, नियम
निर्रहितनिर्भय, निर्धन
निस्बिना, रहितनिष्कपट, निष्फल
परादूर, विपरीतपराजय, पराभव
परिचारों ओरपरिक्रमा, परिधान
प्रआगे, उत्कृष्टप्रकाश, प्रगति
प्रतिसामने, प्रत्येकप्रतिदिन, प्रत्यक्ष
विभिन्न, विशेषविज्ञान, विवाद
सम्साथ, पूर्णसंकल्प, संबंध
सुअच्छा, श्रेष्ठसुपुत्र, सुशिक्षित
ध्यान दें : उद्/उत्, निस्/निर्/निः तथा दुस्/दुर्/दुः संधि के कारण बनने वाले रूप हैं। इन्हें अलग-अलग उपसर्ग नहीं माना जाता।

2. हिंदी के उपसर्ग

कुछ उपसर्ग ऐसे हैं जिनका प्रयोग मुख्यतः हिंदी भाषा में होता है। ये सामान्य बोलचाल तथा आधुनिक हिंदी में अधिक प्रचलित हैं।

उपसर्ग अर्थ उदाहरण
निषेध, अभावअज्ञान, अशुद्ध
अननहीं, अभावअनपढ़, अनजान
भरपूर्णभरपेट, भरपूर
बेबिनाबेईमान, बेकार
बिनरहितबिनब्याहा, बिनबूझे
सहितसपरिवार, ससम्मान
कुबुराकुपुत्र, कुकर्म

3. विदेशी उपसर्ग

हिंदी ने अरबी, फ़ारसी तथा अंग्रेज़ी सहित अनेक भाषाओं से शब्द ग्रहण किए हैं। इनके साथ कुछ विदेशी उपसर्ग भी हिंदी में प्रचलित हो गए हैं।

उपसर्ग भाषा उदाहरण
बेफ़ारसीबेकार, बेईमान
बदफ़ारसीबदनाम, बदसूरत
नाफ़ारसीनाकाम, नालायक
गैरअरबीगैरहाज़िर, गैरकानूनी
लाफ़ारसीलाचार, लापता
हमफ़ारसीहमसफ़र, हमनाम
याद रखने की ट्रिक

यदि उपसर्ग की उत्पत्ति याद रखनी हो, तो केवल यह क्रम याद रखें—

संस्कृत → हिंदी → विदेशी

प्रतियोगी परीक्षाओं में उपसर्गों का वर्गीकरण प्रायः इसी क्रम में पूछा जाता है।

उपसर्ग की पहचान कैसे करें?

प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रायः किसी शब्द को देकर उसमें प्रयुक्त उपसर्ग एवं मूल शब्द अलग करने के लिए कहा जाता है। ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  1. सबसे पहले मूल शब्द पहचानिए।
    यदि शेष बचा हुआ भाग स्वतंत्र शब्द या धातु है, तो उसके पहले का अंश उपसर्ग होगा।

    उदाहरण :
    प्रगति = प्र + गति
    उपकार = उप + कार
    निर्भय = निर् + भय
  2. संधि वाले शब्दों पर विशेष ध्यान दें।
    कई बार संधि के कारण उपसर्ग का मूल रूप बदल जाता है। इसलिए केवल शब्द देखकर निर्णय नहीं करना चाहिए।

    उदाहरण :
    अत्यंत = अति + अंत
    उज्ज्वल = उत् + ज्वल
    प्रत्यक्ष = प्रति + अक्ष
  3. हर प्रारंभिक अक्षर उपसर्ग नहीं होता।
    यदि किसी शब्द के प्रारंभ का भाग हटाने पर कोई सार्थक शब्द नहीं बचता, तो उसे उपसर्ग नहीं माना जाएगा।

उपसर्ग से अर्थ में परिवर्तन

उपसर्ग का सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य मूल शब्द के अर्थ में परिवर्तन करना है। कभी अर्थ बदल जाता है, कभी उसका विस्तार होता है और कभी नया शब्द बन जाता है।

मूल शब्द उपसर्गयुक्त शब्द अर्थ
हार प्रहार चोट करना
हार आहार भोजन
हार विहार भ्रमण करना
बल प्रबल अधिक शक्तिशाली
सत्य असत्य जो सत्य न हो

इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि उपसर्ग जुड़ने पर मूल शब्द का अर्थ पूरी तरह बदल भी सकता है और उसमें विशेषता भी आ सकती है।


उपसर्ग एवं प्रत्यय में अंतर

आधार उपसर्ग प्रत्यय
स्थान शब्द के पहले लगता है। शब्द के अंत में लगता है।
कार्य अर्थ में परिवर्तन या विशेषता लाता है। नया शब्द या नया रूप बनाता है।
उदाहरण प्र + गति = प्रगति सुंदर + ता = सुंदरता
स्वरूप पूर्व में जुड़ने वाला शब्दांश अंत में जुड़ने वाला शब्दांश

उपसर्ग से संबंधित सामान्य त्रुटियाँ

  • प्रत्येक शब्द के प्रारंभिक भाग को उपसर्ग मान लेना।
  • संधि के कारण बदले हुए उपसर्ग को पहचान न पाना।
  • 'दुर्' और 'दुस्' अथवा 'निर्' और 'निस्' को अलग-अलग उपसर्ग समझ लेना।
  • उपसर्ग एवं प्रत्यय में भ्रम करना।
  • मूल शब्द की पहचान किए बिना उपसर्ग अलग करना।
महत्त्वपूर्ण तथ्य :

उपसर्ग पहचानने का सबसे सरल तरीका यह है कि पहले मूल शब्द खोजिए। यदि उसके पहले जुड़ा हुआ अंश अर्थपूर्ण परिवर्तन कर रहा है, तो वही उपसर्ग है।

अभ्यास प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के माध्यम से उपसर्ग विषय पर अपनी समझ का परीक्षण कीजिए।

  1. उपसर्ग किसे कहते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
  2. उपसर्ग की चार प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
  3. उपसर्ग के मुख्य कार्यों का वर्णन उदाहरण सहित कीजिए।
  4. उपसर्गों का वर्गीकरण कीजिए।
  5. संस्कृत के कोई दस प्रमुख उपसर्ग उदाहरण सहित लिखिए।
  6. हिंदी एवं विदेशी उपसर्गों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  7. उपसर्ग एवं प्रत्यय में चार अंतर लिखिए।
  8. निम्नलिखित शब्दों में उपसर्ग तथा मूल शब्द अलग कीजिए—
    • प्रकाश
    • उपकार
    • प्रत्यक्ष
    • निर्भय
    • अत्याचार
    • परिक्रमा
    • दुर्जन
    • विज्ञान
  9. निम्नलिखित उपसर्गों का अर्थ लिखिए—
    • प्र
    • वि
    • अनु
    • सम्
    • सु
  10. उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए कि उपसर्ग शब्द के अर्थ में किस प्रकार परिवर्तन करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. उपसर्ग किसे कहते हैं?

ऐसे शब्दांश जो किसी मूल शब्द या धातु के पहले जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन, विस्तार अथवा विशेषता उत्पन्न करते हैं, उन्हें उपसर्ग कहते हैं।

2. हिंदी में उपसर्गों का वर्गीकरण किस आधार पर होता है?

उत्पत्ति के आधार पर उपसर्गों को तीन वर्गों में बाँटा जाता है — संस्कृत के उपसर्ग, हिंदी के उपसर्ग तथा विदेशी भाषाओं से आए उपसर्ग।

3. उपसर्ग और प्रत्यय में क्या अंतर है?

उपसर्ग शब्द के पहले लगता है और अर्थ में परिवर्तन या विशेषता लाता है, जबकि प्रत्यय शब्द के अंत में लगता है और नया शब्द या नया रूप बनाता है।

4. "निर्भय" शब्द में उपसर्ग और मूल शब्द क्या हैं?

"निर्भय" में "निर्" उपसर्ग है और "भय" मूल शब्द है।

5. क्या हर शब्द के प्रारंभिक अक्षर उपसर्ग होते हैं?

नहीं। किसी शब्द में उपसर्ग तभी माना जाता है जब उसे हटाने पर शेष भाग एक सार्थक स्वतंत्र शब्द या धातु के रूप में बचे।


सारांश

उपसर्ग ऐसे शब्दांश हैं जो किसी मूल शब्द अथवा धातु के पूर्व जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन, विस्तार अथवा विशेषता उत्पन्न करते हैं। हिंदी भाषा में मुख्यतः संस्कृत, हिंदी तथा विदेशी भाषाओं से आए उपसर्गों का प्रयोग होता है। उपसर्गों का सही ज्ञान न केवल शुद्ध भाषा-प्रयोग के लिए आवश्यक है, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

उपसर्ग का अध्ययन करते समय उसके अर्थ, प्रयोग, वर्गीकरण तथा मूल शब्द की पहचान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यदि मूल शब्द सही पहचान लिया जाए, तो अधिकांश प्रश्नों का उत्तर सरलता से दिया जा सकता है।


संदर्भ ग्रंथ

  • अष्टाध्यायी — महर्षि पाणिनि
  • सिद्धान्तकौमुदी — भट्टोजि दीक्षित
  • हिंदी व्याकरण — पंडित कामताप्रसाद गुरु
  • मानक हिंदी व्याकरण — डॉ. हरदेव बाहरी
  • व्यावहारिक हिंदी व्याकरण — डॉ. वासुदेवनंदन प्रसाद

यह भी पढ़ें

निष्कर्ष :

यदि आप उपसर्ग, प्रत्यय और समास—इन तीनों अध्यायों को अच्छी तरह समझ लेते हैं, तो हिंदी व्याकरण के शब्द-निर्माण संबंधी अधिकांश प्रश्नों को आसानी से हल कर सकते हैं। इसलिए उपसर्ग का अध्ययन केवल परिभाषा तक सीमित न रखकर उसके प्रयोग और अर्थ-परिवर्तन को भी समझना आवश्यक है।

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