हिंदी व्याकरण में लिंग एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक तत्व है। इसके माध्यम से किसी संज्ञा या सर्वनाम के पुरुष अथवा स्त्री जाति का बोध होता है। शुद्ध भाषा-प्रयोग के लिए लिंग का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि वाक्य में प्रयुक्त विशेषण, सर्वनाम तथा क्रिया का रूप अनेक बार संज्ञा के लिंग के अनुसार बदल जाता है।
विद्यालयी तथा प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, UPPSC, SSC, Railway, CTET, UPTET, TGT, PGT आदि) में लिंग से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इसलिए इसकी परिभाषा, भेद तथा शुद्ध प्रयोग का ज्ञान प्रत्येक विद्यार्थी के लिए आवश्यक है।
विषय-सूची
- लिंग किसे कहते हैं?
- लिंग के भेद
- पुल्लिंग
- स्त्रीलिंग
- पुल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाने के प्रमुख नियम
- महत्वपूर्ण उदाहरण
- महत्वपूर्ण नोट
- परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
- अभ्यास प्रश्न
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लिंग किसे कहते हैं?
संज्ञा अथवा सर्वनाम के जिस रूप से उसके पुरुष या स्त्री जाति का बोध होता है, उसे लिंग कहते हैं।
सरल शब्दों में, जिस व्याकरणिक आधार पर यह ज्ञात हो कि कोई व्यक्ति, प्राणी अथवा वस्तु पुल्लिंग है या स्त्रीलिंग, वही लिंग कहलाता है।
उदाहरण:
- लड़का खेल रहा है।
- लड़की पढ़ रही है।
- शेर जंगल का राजा कहलाता है।
- शेरनी अपने बच्चों की रक्षा करती है।
किसी शब्द का लिंग केवल उसके रूप से ही नहीं, बल्कि उसके प्रचलित एवं शुद्ध प्रयोग से भी निर्धारित होता है। इसलिए अनेक शब्दों का सही लिंग अभ्यास एवं भाषा-प्रयोग से सीखा जाता है।
लिंग के भेद
हिंदी व्याकरण में लिंग के दो भेद माने जाते हैं—
- पुल्लिंग
- स्त्रीलिंग
इन दोनों के आधार पर संज्ञा तथा सर्वनाम के लिंग का निर्धारण किया जाता है।
1. पुल्लिंग
जिस संज्ञा अथवा सर्वनाम के रूप से पुरुष जाति का बोध हो, उसे पुल्लिंग कहते हैं।
उदाहरण:
- बालक विद्यालय गया।
- राजा न्याय कर रहा है।
- घोड़ा तेज दौड़ता है।
- सिंह वन का राजा कहलाता है।
- पिताजी कार्यालय गए हैं।
2. स्त्रीलिंग
जिस संज्ञा अथवा सर्वनाम के रूप से स्त्री जाति का बोध हो, उसे स्त्रीलिंग कहते हैं।
उदाहरण:
- बालिका विद्यालय गई।
- रानी प्रजा का ध्यान रखती है।
- घोड़ी मैदान में दौड़ रही है।
- सिंहनी अपने शावकों की रक्षा करती है।
- माता बच्चों की देखभाल करती हैं।
| पुल्लिंग | स्त्रीलिंग |
|---|---|
| बालक | बालिका |
| राजा | रानी |
| घोड़ा | घोड़ी |
| सिंह | सिंहनी |
| पिता | माता |
किसी शब्द का लिंग निर्धारित करते समय केवल उसके रूप पर निर्भर नहीं होना चाहिए। अनेक शब्दों का लिंग उनके प्रचलित एवं मान्य प्रयोग के आधार पर निश्चित किया जाता है। इसलिए शुद्ध भाषा-प्रयोग के लिए सही लिंग का ज्ञान आवश्यक है।
पुल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाने के प्रमुख नियम
हिंदी भाषा में अनेक पुल्लिंग शब्दों के स्त्रीलिंग रूप निश्चित नियमों के अनुसार बनते हैं। यद्यपि सभी शब्द एक ही नियम का पालन नहीं करते, फिर भी कुछ प्रमुख नियमों की जानकारी शुद्ध भाषा-प्रयोग के लिए आवश्यक है।
1. 'अ' या 'आ' के स्थान पर 'ई' होने से
| पुल्लिंग | स्त्रीलिंग |
|---|---|
| लड़का | लड़की |
| घोड़ा | घोड़ी |
| बेटा | बेटी |
2. 'नी' प्रत्यय जोड़ने से
| पुल्लिंग | स्त्रीलिंग |
|---|---|
| शेर | शेरनी |
| मोर | मोरनी |
| ऊँट | ऊँटनी |
3. शब्द बदल जाने पर
कुछ शब्दों का स्त्रीलिंग किसी नियम से नहीं बनता, बल्कि उनके लिए पूर्णतः भिन्न शब्द प्रयुक्त होते हैं।
| पुल्लिंग | स्त्रीलिंग |
|---|---|
| पिता | माता |
| पति | पत्नी |
| राजा | रानी |
| भाई | बहन |
पुल्लिंग एवं स्त्रीलिंग के महत्वपूर्ण उदाहरण
महत्वपूर्ण पुल्लिंग–स्त्रीलिंग शब्द
निम्नलिखित पुल्लिंग एवं स्त्रीलिंग शब्द प्रतियोगी परीक्षाओं तथा शुद्ध भाषा-प्रयोग की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनका नियमित अभ्यास करना उपयोगी रहता है।
| पुल्लिंग | स्त्रीलिंग | पुल्लिंग | स्त्रीलिंग |
|---|---|---|---|
| राजा | रानी | देव | देवी |
| कवि | कवयित्री | विद्वान | विदुषी |
| अभिनेता | अभिनेत्री | गायक | गायिका |
| अध्यापक | अध्यापिका | विद्यार्थी | विद्यार्थिनी |
| सेवक | सेविका | नायक | नायिका |
| वर | वधू | दूल्हा | दुल्हन |
| पिता | माता | पति | पत्नी |
| पुत्र | पुत्री | भाई | बहन |
| शेर | शेरनी | सिंह | सिंहनी |
| मोर | मोरनी | ऊँट | ऊँटनी |
| हाथी | हथिनी | घोड़ा | घोड़ी |
| बकरा | बकरी | बैल | गाय |
| नर | मादा | चाचा | चाची |
| मामा | मामी | देवर | देवरानी |
| जेठ | जेठानी | ससुर | सास |
हिंदी व्याकरण में लिंग के केवल दो भेद—पुल्लिंग और स्त्रीलिंग माने जाते हैं, जबकि संस्कृत व्याकरण में तीन लिंग—पुल्लिंग, स्त्रीलिंग एवं नपुंसकलिंग स्वीकार किए गए हैं। अतः हिंदी और संस्कृत के लिंग-विभाजन में यह एक महत्वपूर्ण अंतर है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
- हिंदी व्याकरण में लिंग के केवल दो भेद माने जाते हैं—पुल्लिंग एवं स्त्रीलिंग।
- संस्कृत व्याकरण में तीन लिंग—पुल्लिंग, स्त्रीलिंग एवं नपुंसकलिंग—स्वीकार किए गए हैं।
- लिंग का प्रभाव वाक्य में प्रयुक्त विशेषण, सर्वनाम तथा क्रिया के रूप पर भी पड़ता है।
- अनेक शब्दों का लिंग उनके रूप से नहीं, बल्कि मान्य एवं प्रचलित प्रयोग से निश्चित होता है।
- प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रायः पुल्लिंग–स्त्रीलिंग रूपांतरण तथा शुद्ध प्रयोग से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।
अभ्यास प्रश्न
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ)
- हिंदी व्याकरण में लिंग के कितने भेद माने जाते हैं?
- (क) एक
- (ख) दो
- (ग) तीन
- (घ) चार
- 'रानी' किस लिंग का शब्द है?
- (क) पुल्लिंग
- (ख) स्त्रीलिंग
- (ग) नपुंसकलिंग
- (घ) इनमें से कोई नहीं
- 'शेरनी' का पुल्लिंग रूप क्या है?
- (क) बाघ
- (ख) सिंह
- (ग) शेर
- (घ) चीता
- निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द पुल्लिंग है?
- (क) गायिका
- (ख) माता
- (ग) अध्यापक
- (घ) देवी
- हिंदी में नपुंसकलिंग का स्थान किस व्याकरण में मिलता है?
- (क) हिंदी
- (ख) संस्कृत
- (ग) उर्दू
- (घ) अंग्रेज़ी
लघु उत्तरीय प्रश्न
- लिंग किसे कहते हैं?
- लिंग के भेदों के नाम लिखिए।
- पुल्लिंग एवं स्त्रीलिंग में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- पुल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाने के दो प्रमुख नियम उदाहरण सहित लिखिए।
- हिंदी और संस्कृत के लिंग-विभाजन में क्या अंतर है?
उत्तर (MCQ): 1-(ख), 2-(ख), 3-(ग), 4-(ग), 5-(ख)
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