सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

मुहावरे किसे कहते हैं? परिभाषा, भेद एवं 70+ उदाहरण अर्थ सहित

मुहावरे हिंदी भाषा की वह विशेषता हैं, जो सामान्य वाक्यों को भी जीवंत, रोचक और प्रभावशाली बना देते हैं। जब हम कहते हैं "उसने मेरी नाक में दम कर दिया", तो हमारा आशय वास्तविक नाक से नहीं, बल्कि बहुत परेशान किए जाने से होता है। यही मुहावरों की सबसे बड़ी विशेषता है — इनका शाब्दिक अर्थ नहीं, बल्कि इनका लाक्षणिक (छिपा हुआ) अर्थ लिया जाता है।

विद्यालयी परीक्षाओं से लेकर UPSC, SSC, बैंक, रेलवे, CTET, UPTET, TGT, PGT तथा लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में मुहावरों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं — कभी अर्थ पूछकर, कभी सही वाक्य-प्रयोग चुनवाकर।

इस लेख में आप मुहावरे की परिभाषा, विशेषताएँ, मुहावरे और लोकोक्ति में अंतर, तथा 70+ प्रमुख मुहावरे — अर्थ एवं वाक्य-प्रयोग सहित — श्रेणीवार सीखेंगे।

मुहावरे किसे कहते हैं?

वाक्य में प्रयुक्त होने वाला वह शब्द-समूह, जिसका अर्थ उसके शब्दों के सामान्य (शाब्दिक) अर्थ से भिन्न होकर कोई विशेष, रूढ़ एवं लाक्षणिक अर्थ प्रकट करे, उसे मुहावरा कहते हैं।

उदाहरण से समझें:

"आँखों में धूल झोंकना" — यदि इसका शाब्दिक अर्थ लें तो यह आँखों में धूल डालने की बात लगेगी। लेकिन वाक्य में इसका वास्तविक अर्थ है — धोखा देना। जैसे — "दुकानदार ने ग्राहक की आँखों में धूल झोंककर नकली सामान बेच दिया।"

मुहावरों की प्रमुख विशेषताएँ

  • मुहावरे स्वयं में पूर्ण वाक्य नहीं होते, बल्कि वाक्य के भीतर प्रयुक्त होते हैं।
  • इनका अर्थ शाब्दिक न होकर लाक्षणिक (छिपा हुआ) होता है।
  • मुहावरों का रूप प्रायः स्थिर (रूढ़) रहता है, इनमें मनमाना परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
  • ये भाषा को संक्षिप्त, सजीव तथा प्रभावशाली बनाते हैं।
  • मुहावरे क्रिया के अनुसार लिंग, वचन, काल में बदल सकते हैं — जैसे "नाक में दम करना" → "नाक में दम कर दिया" → "नाक में दम कर रही है"।

मुहावरे और लोकोक्ति में अंतर

विद्यार्थी अक्सर मुहावरे और लोकोक्ति (कहावत) में भ्रमित हो जाते हैं। दोनों में एक बुनियादी अंतर याद रखने से यह भ्रम दूर हो जाता है।

आधार मुहावरा लोकोक्ति
स्वरूप अपूर्ण वाक्यांश, वाक्य में प्रयुक्त होता है अपने आप में पूर्ण वाक्य होता है
उद्देश्य भाषा को रोचक व प्रभावशाली बनाना जीवन का अनुभव या नीति व्यक्त करना
प्रयोग वाक्य के एक अंश के रूप में स्वतंत्र कथन के रूप में
उदाहरण नाक में दम करना अंधा क्या चाहे, दो आँखें
ध्यान दें: हिंदी व्याकरण में मुहावरों को शब्द-शक्ति के अंतर्गत लक्षणा का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है — क्योंकि इनमें शब्द अपना शाब्दिक अर्थ छोड़कर उससे संबंधित दूसरे अर्थ को व्यक्त करते हैं।

मुहावरों का वर्गीकरण

याद रखने और अभ्यास करने में सुविधा के लिए मुहावरों को उनके स्रोत के आधार पर श्रेणियों में बाँटा जा सकता है। यहाँ पाँच प्रमुख श्रेणियों में सबसे अधिक प्रचलित एवं परीक्षोपयोगी मुहावरे दिए गए हैं।

1. शरीर के अंगों से संबंधित मुहावरे

मुहावरा अर्थ वाक्य में प्रयोग
आँखें दिखानाक्रोध से डरानापिताजी के आँखें दिखाते ही बच्चा चुप हो गया।
आँखों में धूल झोंकनाधोखा देनाठग ने बूढ़ी महिला की आँखों में धूल झोंककर उसके गहने चुरा लिए।
आँख का तारा होनाबहुत प्रिय होनाछोटी बेटी अपने पिता की आँख का तारा है।
आँखें खुलनासच्चाई का ज्ञान होनाठगे जाने के बाद ही उसकी आँखें खुलीं।
आँखें बिछानाबड़े आदर-सत्कार से स्वागत करनागाँव वालों ने मेहमानों के लिए आँखें बिछा दीं।
कान भरनाचुगली करके भड़कानापड़ोसी ने माँ के कान भरकर दोनों भाइयों में झगड़ा करवा दिया।
कान का कच्चा होनाजल्दी किसी की बात मान लेनाराजा कान का कच्चा था, इसी कारण मंत्री उसे आसानी से भड़का देते थे।
कान खड़े होनासतर्क हो जानाअजीब आवाज़ सुनते ही सिपाही के कान खड़े हो गए।
नाक में दम करनाबहुत परेशान करनाबच्चों के शोर ने पड़ोसियों की नाक में दम कर दिया।
नाक रगड़नाबहुत विनती करनामाफी माँगने के लिए उसे नाक रगड़नी पड़ी।
नाक कटनाअपमानित होनाबेटे की करतूत से पूरे परिवार की नाक कट गई।
मुँह में पानी आनाकिसी वस्तु को पाने की तीव्र इच्छा होनागरमागरम पकौड़े देखकर सबके मुँह में पानी आ गया।
मुँह की खानाहार जानाचुनाव में विरोधी उम्मीदवार को मुँह की खानी पड़ी।
मुँह देखते रह जानाचकित/हैरान रह जानाअचानक हुई घोषणा सुनकर सब उसका मुँह देखते रह गए।
सिर पर चढ़नालाड़-प्यार में बिगड़ जानाअत्यधिक दुलार से बच्चा सिर पर चढ़ गया है।
सिर आँखों पर बिठानाबहुत आदर-सम्मान देनाघर आए मेहमान को उसने सिर आँखों पर बिठाया।
सिर मुँडाते ही ओले पड़नाकाम शुरू करते ही मुसीबत आनादुकान खोलते ही घाटा होने लगा — यह तो सिर मुँडाते ही ओले पड़ने वाली बात हुई।
हाथ पैर मारनाकोशिश करनानौकरी पाने के लिए उसने बहुत हाथ पैर मारे।
हाथ मलनापछतानासमय पर काम न करने पर अब हाथ मलने से क्या फ़ायदा।
हाथ खाली होनापैसे न होनामहीने के अंत तक उसका हाथ खाली हो जाता है।
दाँत खट्टे करनाबुरी तरह हरानाभारतीय सेना ने शत्रुओं के दाँत खट्टे कर दिए।
दाँतों तले उँगली दबानाआश्चर्यचकित होनाउसकी प्रतिभा देखकर सभी दाँतों तले उँगली दबा बैठे।
पेट में चूहे कूदनाबहुत भूख लगनादोपहर होते-होते पेट में चूहे कूदने लगे।
गले का हार होनाबहुत प्रिय होनावह अपने माता-पिता के गले का हार है।
गला छूटनापीछा छूटनाकर्ज़ चुकाकर उसका गला छूटा।

2. पशु-पक्षियों से संबंधित मुहावरे

मुहावरा अर्थ वाक्य में प्रयोग
ऊँट के मुँह में जीराआवश्यकता से बहुत कम मिलनापूरे परिवार के लिए वह वेतन तो ऊँट के मुँह में जीरा है।
कुत्ते की मौत मरनाबहुत अपमानजनक तरीके से मरनाअपने कर्मों के कारण वह कुत्ते की मौत मरा।
बिल्ली के भाग्य से छींका टूटनाबिना प्रयास लाभ मिलनाबिना पढ़े परीक्षा पास कर लेना तो बिल्ली के भाग्य से छींका टूटने जैसा है।
गधे को बाप बनानास्वार्थवश मूर्ख की चापलूसी करनाकाम निकलवाने के लिए वह गधे को बाप बनाने में भी नहीं हिचकता।
शेर का जिगर होनाबहुत साहसी होनाअकेले डाकुओं का सामना करने के लिए शेर का जिगर चाहिए।
मुर्गे की एक टांगअपनी बात पर अड़े रहनावह अपनी माँग पर मुर्गे की एक टांग लेकर बैठा रहा।
काला अक्षर भैंस बराबरबिल्कुल अनपढ़ होनाउसके लिए अंग्रेज़ी अभी भी काला अक्षर भैंस बराबर है।
साँप छछूँदर की गति होनादुविधा की स्थिति में होनाअब उसकी हालत साँप छछूँदर की गति जैसी हो गई है — न कह सकता है, न सह सकता है।

3. संख्याओं से संबंधित मुहावरे

मुहावरा अर्थ वाक्य में प्रयोग
नौ दो ग्यारह होनाभाग जानापुलिस को देखते ही चोर नौ दो ग्यारह हो गया।
एक आँख से देखनाबिना भेदभाव के समान व्यवहार करनाएक अच्छा शिक्षक सभी विद्यार्थियों को एक आँख से देखता है।
छठी का दूध याद आनाबहुत कष्ट का अनुभव होनापहाड़ चढ़ते-चढ़ते उसे छठी का दूध याद आ गया।
दो टूक बात करनास्पष्ट रूप से कहनामालिक ने कर्मचारी से दो टूक बात कर दी।
एक पंथ दो काजएक प्रयास से दो लाभ होनाबाज़ार जाते समय सब्ज़ी और दवाई दोनों ले आया — एक पंथ दो काज हो गया।
चार चाँद लगानाशोभा बढ़ानाउसकी उपस्थिति ने समारोह में चार चाँद लगा दिए।
सात घाट का पानी पीनाबहुत अनुभवी और चतुर होनावह व्यापारी सात घाट का पानी पिए हुए है, उसे धोखा देना आसान नहीं।

4. प्रकृति एवं वस्तुओं से संबंधित मुहावरे

मुहावरा अर्थ वाक्य में प्रयोग
आसमान से बातें करनाबहुत ऊँचा होना / बहुत उन्नति करनायह इमारत तो आसमान से बातें करती है।
आग में घी डालनापहले से चल रहे झगड़े को भड़कानाबीच में बोलकर उसने आग में घी डालने का काम किया।
आग बबूला होनाबहुत क्रोधित होनासच्चाई सुनते ही वह आग बबूला हो गया।
पानी पानी होनाबहुत शर्मिंदा होनासबके सामने झूठ पकड़े जाने पर वह पानी पानी हो गया।
दूध का दूध पानी का पानी करनासही-सही न्याय करनापंचायत ने मामले में दूध का दूध पानी का पानी कर दिया।
लोहा लेनामुक़ाबला करनाछोटी सेना ने बड़ी सेना से लोहा लिया।
लोहे के चने चबानाबहुत कठिन कार्य करनापहाड़ी रास्तों पर चढ़ना लोहे के चने चबाने जैसा है।
तूती बोलनाप्रभाव/दबदबा होनाबाज़ार में उस व्यापारी की तूती बोलती है।
ईंट से ईंट बजानापूरी तरह नष्ट कर देनाबाढ़ ने पूरे गाँव की ईंट से ईंट बजा दी।
हवा में उड़नाघमंड करनाथोड़ी सफलता मिलते ही वह हवा में उड़ने लगा।
हवा हो जानाअचानक गायब हो जानापैसे लेते ही ठग हवा हो गया।
जान हथेली पर रखनाजोखिम के लिए तैयार होनासैनिक जान हथेली पर रखकर सीमा की रक्षा करते हैं।
जान में जान आनाराहत/चैन मिलनाबेटे का फोन आते ही माँ की जान में जान आई।
आसमान सिर पर उठानाबहुत शोर मचानाछोटी सी बात पर उसने आसमान सिर पर उठा लिया।
अंगारों पर लोटनाबहुत बेचैन/व्याकुल रहनापरिणाम आने तक वह अंगारों पर लोटता रहा।
अंधेरे में तीर चलानाबिना जानकारी अनुमान लगानाबिना तैयारी के परीक्षा देना अंधेरे में तीर चलाने जैसा है।
आड़े हाथों लेनाकड़ी फटकार लगानागलती पकड़े जाने पर शिक्षक ने उसे आड़े हाथों लिया।

5. स्वभाव एवं कार्य से संबंधित मुहावरे

मुहावरा अर्थ वाक्य में प्रयोग
दिन में तारे दिखाई देनाबहुत कष्ट का अनुभव होनाभारी बोझ उठाते ही उसे दिन में तारे दिखाई दिए।
नमक मिर्च लगानाबात बढ़ा-चढ़ाकर कहनाउसने नमक मिर्च लगाकर पूरी घटना सुनाई।
पापड़ बेलनाकठिन परिश्रम करनानौकरी पाने के लिए उसे बहुत पापड़ बेलने पड़े।
हाथ धोकर पीछे पड़नादृढ़ता से पीछे लग जानावह हाथ धोकर उसके पीछे पड़ गया कि पैसे वसूल कर के रहेगा।
मक्खी पर मक्खी मारनाबिना सोचे-समझे नकल करनावह हर बात में केवल मक्खी पर मक्खी मारता है, अपना कुछ नहीं सोचता।
घी के दीये जलानाबहुत खुशी मनानाबेटे की सफलता पर परिवार ने घी के दीये जलाए।
खून पसीना एक करनाबहुत मेहनत करनाकिसान खून पसीना एक करके फ़सल उगाता है।
जी चुरानाकाम से बचनावह हमेशा मेहनत के काम से जी चुराता है।
टका सा जवाब देनासाफ इनकार करनामदद माँगने पर उसने टका सा जवाब दे दिया।
डींग हांकनाशेखी बघारनाबिना काम किए वह केवल डींग हांकता रहता है।
पेट में बात न पचनाराज़ न रख पानाउसके पेट में कोई बात नहीं पचती, सबको बता देता है।
मुँह में राम बगल में छुरीऊपर से भला दिखना, मन में बुराई रखनाउस व्यक्ति का तो मुँह में राम बगल में छुरी वाला स्वभाव है।
बगलें झाँकनालज्जित होकर उत्तर न दे पानासवाल पूछते ही वह बगलें झाँकने लगा।
रंग में भंग होनाखुशी के अवसर पर विघ्न पड़नाअचानक बारिश से समारोह का रंग में भंग हो गया।
लाल पीला होनाक्रोधित होनाबात सुनते ही वह लाल पीला हो गया।
साँप सूँघ जानाचुप्पी साध लेनासवाल सुनते ही उसे मानो साँप सूँघ गया।

परीक्षा में मुहावरे कैसे पूछे जाते हैं?

प्रतियोगी परीक्षाओं में मुहावरों से संबंधित प्रश्न मुख्यतः दो प्रकार से पूछे जाते हैं—

  • अर्थ पूछना: किसी मुहावरे को देकर उसका सही अर्थ चुनने के लिए कहा जाता है। जैसे — "नाक में दम करना" मुहावरे का अर्थ है? (क) मरना (ख) बहुत परेशान करना ✅ (ग) खुश होना
  • वाक्य-प्रयोग पहचानना: कई विकल्पों में से यह पहचानना होता है कि किस वाक्य में मुहावरे का सही प्रयोग हुआ है।
परीक्षा टिप: मुहावरे को हमेशा उसके पूरे रूप में याद करें (जैसे केवल "आँख" नहीं, बल्कि "आँखों में धूल झोंकना")। शाब्दिक अर्थ पर ध्यान न देकर सीधे उसके प्रचलित/लाक्षणिक अर्थ को याद रखें।

मुहावरों से जुड़ी सामान्य भूलें

  • मुहावरे का शाब्दिक अर्थ लेने की भूल करना।
  • मुहावरे को स्वतंत्र वाक्य समझकर लोकोक्ति से भ्रमित करना।
  • मुहावरे के रूढ़ रूप में मनमाना बदलाव कर देना (जैसे "नाक में दम करना" को "नाक में परेशानी करना" कहना)।
  • वाक्य में मुहावरे का लिंग-वचन-काल के अनुसार सही रूप न बदल पाना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. मुहावरा किसे कहते हैं?

वाक्य में प्रयुक्त होने वाला वह शब्द-समूह, जिसका अर्थ उसके शब्दों के शाब्दिक अर्थ से भिन्न होकर कोई विशेष लाक्षणिक अर्थ प्रकट करे, उसे मुहावरा कहते हैं।

2. मुहावरे और लोकोक्ति में क्या अंतर है?

मुहावरा एक अपूर्ण वाक्यांश है जो वाक्य के भीतर प्रयुक्त होता है, जबकि लोकोक्ति अपने आप में पूर्ण वाक्य होती है और जीवन का कोई अनुभव या नीति व्यक्त करती है।

3. मुहावरों का शाब्दिक अर्थ क्यों नहीं लिया जाता?

क्योंकि मुहावरे लक्षणा शब्द-शक्ति पर आधारित होते हैं — इनका मुख्य अर्थ छोड़कर उससे संबंधित दूसरा, रूढ़ अर्थ ग्रहण किया जाता है।

4. "नाक में दम करना" मुहावरे का क्या अर्थ है?

"नाक में दम करना" का अर्थ है — बहुत परेशान करना।

5. प्रतियोगी परीक्षाओं में मुहावरों से किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं?

सामान्यतः किसी मुहावरे का सही अर्थ चुनने या किसी वाक्य में मुहावरे के सही प्रयोग की पहचान करने से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।

यह भी पढ़ें

निष्कर्ष

मुहावरे हिंदी भाषा की जान हैं — ये सामान्य वाक्यों में जान डाल देते हैं और भाषा को अधिक सजीव, संक्षिप्त तथा प्रभावशाली बनाते हैं। विद्यालयी परीक्षाओं से लेकर हर प्रतियोगी परीक्षा तक इनका विशेष महत्व है। इस लेख में दिए गए 70+ मुहावरों का श्रेणीवार अभ्यास करने से न केवल आपकी परीक्षा की तैयारी मज़बूत होगी, बल्कि आपकी बोलचाल की हिंदी भी अधिक प्रभावशाली बनेगी।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

चार वेद, छह शास्त्र (वेदांग)और अठारह पुराण – परिचय, वर्गीकरण एवं सम्पूर्ण प्रामाणिक जानकारी

भारतीय ज्ञान-परंपरा विश्व की सबसे प्राचीन एवं समृद्ध ज्ञान-परंपराओं में से एक है। इस परंपरा की नींव वेदों पर टिकी है, और इसी नींव पर उपनिषद, वेदांग, दर्शन-शास्त्र तथा पुराण जैसे अनेक ग्रंथों का विशाल भवन खड़ा हुआ है। प्रायः विद्यार्थियों और सामान्य पाठकों के मन में चार वेद, छह शास्त्र (वेदांग) तथा अठारह पुराणों को लेकर कई भ्रम रहते हैं — जैसे "छह शास्त्र" वास्तव में कौन-से हैं, अठारहवां पुराण वायु है या शिव, कौन-सा उपनिषद किस वेद से जुड़ा है, अथवा कल्पसूत्र क्या होते हैं। अधिकांश लेख इस विषय पर केवल नामों की सूची तक सीमित रह जाते हैं। इस लेख में हम इससे आगे बढ़कर प्रत्येक ग्रंथ-समूह की प्रकृति, आंतरिक संरचना, संबंधित ब्राह्मण-आरण्यक ग्रंथों, तथा हर भ्रम के पीछे के वास्तविक कारण को भी विस्तार से, प्रामाणिक ढंग से समझेंगे। वैदिक साहित्य की संरचना भारतीय शास्त्र-परंपरा को मोटे तौर पर दो भागों में बांटा जाता है — श्रुति और स्मृति । श्रुति का अर्थ है वह ज्ञान जो ऋषियों ने साधना और श्रवण द्वारा प्राप्त किया — इसके अंतर्गत चारों वेद और उनसे जुड़े संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक तथा उ...

हिंदी भाषा की विशेषताएँ – उत्पत्ति, इतिहास, महत्व एवं सम्पूर्ण प्रामाणिक जानकारी

एक नज़र में हिंदी भारत की राजभाषा है। हिंदी भाषा की लिपि देवनागरी है। हिंदी का विकास संस्कृत → प्राकृत → अपभ्रंश → आधुनिक हिंदी के रूप में हुआ। हिंदी विश्व की प्रमुख भाषाओं में से एक है तथा विश्वभर में करोड़ों लोग इसे बोलते और समझते हैं। "हिन्दी भारतीय संस्कृति की आत्मा है" — कमलापति त्रिपाठी का यह कथन हिंदी के महत्व को बहुत सटीक ढंग से व्यक्त करता है। हिंदी केवल संवाद का माध्यम भर नहीं, बल्कि भारत की पहचान का प्रतिनिधित्व करने वाली भाषा है। इस लेख में हम हिंदी की उत्पत्ति, उसकी भाषिक विशेषताओं तथा वर्तमान वैश्विक स्थिति को विस्तार से, तथ्यों सहित समझेंगे — हिंदी भाषा का परिचय हिंदी भारत की राजभाषा है तथा विश्व की सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में गिनी जाती है। यह केवल भारत तक सीमित नहीं — नेपाल, मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, त्रिनिदाद एवं टोबैगो, गुयाना जैसे कई देशों में भी हिंदी बोली और समझी जाती है। हिंदी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह विशाल जनसमूह की भाषा होते हुए भी अपनी सरलता और वैज्ञानिकता के लिए जानी जाती है। हिंदी की उत्पत्ति और विकास हिंदी का उद्भव संस्कृत से हु...

देवनागरी लिपि - उत्पत्ति, नामकरण व विशेषताएँ | Devanagari Lipi

देवनागरी लिपि वर्तमान समय में प्रचलित समस्त लिपियों में सर्वाधिक व्यवस्थित, समर्थ एवं वैज्ञानिक लिपि है। हिंदी भाषा की लिपि देवनागरी है। हिंदी के अतिरिक्त संस्कृत, मराठी, मैथिली, कोंकणी एवं कतिपय विदेशी भाषाएँ (जैसे नेपाली) भी देवनागरी में लिखी जाती हैं। यह लिपि भारत की अनेक अन्य लिपियों के सन्निकट भी है। इस आलेख में हम देवनागरी लिपि की उत्पत्ति, इसके नामकरण, विशेषताओं, वैज्ञानिकता, गुण-दोष तथा अन्य लिपियों से इसकी तुलना — इन सभी पक्षों को विस्तार एवं प्रामाणिकता के साथ जानेंगे। देवनागरी लिपि की उत्पत्ति संसार की सभी भाषाओं को लिखने के लिए किसी न किसी लिपि का प्रयोग किया जाता है। उसी प्रकार देवनागरी भी एक लिपि है जिसका प्रयोग मूलतः हिंदी भाषा को लिखने के लिए किया जाता है। देवनागरी लिपि की उत्पत्ति मूलतः ब्राह्मी लिपि से हुई है। प्राचीन समय में आर्यों द्वारा प्रयुक्त ब्राह्मी लिपि संभवतः दुनिया की सर्वाधिक परिपूर्ण प्राचीन लिपि है। उर्दू और सिंधी के अतिरिक्त समस्त भारतीय लिपियों का जन्म ब्राह्मी लिपि से हुआ है। तीसरी-चौथी शताब्दी से ही भारतवर्ष में ब्राह्मी लिपि का प्रचलन था। ...

रामचरितमानस (तुलसी रामायण) के सात कांड || 7 Kand of Ramcharitmans (Tulsidas_Ramayan)

रामचरितमानस (रामायण) : हिंदी साहित्य की अनमोल धरोहर श्री रामचरितमानस (तुलसीकृत रामायण) हिंदी साहित्य की अमूल्य निधि है। इस महाकाव्य की रचना संत तुलसीदास द्वारा १६वीं शताब्दी में 'अवधी भाषा' में की गई थी। हिंदी भाषियों के बीच यह रामायण (Ramayan) के रूप में ही प्रसिद्ध है। कहते हैं तुलसीदास जी महर्षि वाल्मीकि ही थे जिन्होंने कलयुग में तुलसीदास के रूप में जन्म लेकर रामायण को जनकल्याणकारी और सर्वसुलभ रूप में सामान्य जनमानस के समक्ष उद्घाटित किया और उसे नाम दिया- 'रामचरितमानस'। रामचरितमानस की हर चौपाई में सीता-राम हैं क्योंकि इसकी हर चौपाई में स, त, र, म अवश्य मिलेगा। इसी कारण इसकी एक-एक चौपाई को मंत्र की तरह प्रयोग किया जाता है। रामचरित मानस का भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का आदर्श और अनुकरणीय जीवन चरित चित्रित करने वाले इस महाग्रंथ को यदि "हिन्दू जनमानस की आदर्श आचार संहिता" जाय तो अनुचित न होगा। रामचरितमानस विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय पचास (५०) काव्य ग्रंथों में से एक है। माना जाता है कि तुलसीदास जी ने लोककल...