जब हम अपने मन की बात किसी दूसरे व्यक्ति तक स्पष्ट रूप से पहुँचाना चाहते हैं, तो शब्दों को एक निश्चित क्रम में व्यवस्थित करके बोलते या लिखते हैं।
हिंदी व्याकरण में वाक्य का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। भाषा के माध्यम से विचारों, भावों, आदेशों, प्रश्नों और सूचनाओं का आदान-प्रदान वाक्यों के द्वारा ही होता है। यदि शब्दों का क्रम उचित न हो या भाव पूर्ण न हो, तो वाक्य अपना अर्थ खो देता है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में वाक्य से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इसलिए वाक्य की परिभाषा, उसके भेद, आवश्यक तत्त्व, उद्देश्य-विधेय तथा वाक्य निर्माण के नियमों का ज्ञान प्रत्येक विद्यार्थी के लिए आवश्यक है।
इस लेख में आप वाक्य किसे कहते हैं, वाक्य की परिभाषा, विभिन्न विद्वानों की परिभाषाएँ, वाक्य के आवश्यक तत्त्व, उद्देश्य और विधेय, वाक्य के भेद, उदाहरण, सामान्य त्रुटियाँ, परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य तथा अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न विस्तार से पढ़ेंगे।
- वाक्य किसे कहते हैं?
- वाक्य की परिभाषा
- संस्कृत एवं हिंदी विद्वानों के मत
- वाक्य के आवश्यक तत्त्व
- उद्देश्य और विधेय
- वाक्य के भेद
- उदाहरण सहित सम्पूर्ण व्याख्या
- प्रतियोगी परीक्षाओं के महत्वपूर्ण तथ्य
वाक्य किसे कहते हैं?
सार्थक शब्दों का ऐसा व्यवस्थित समूह, जो किसी पूर्ण विचार, भाव, प्रश्न, आदेश अथवा सूचना का बोध कराए, वाक्य कहलाता है।
दूसरे शब्दों में, जब शब्द उचित क्रम में व्यवस्थित होकर श्रोता या पाठक के मन में पूर्ण अर्थ उत्पन्न करते हैं, तब वे वाक्य का रूप धारण कर लेते हैं।
उदाहरण
- राम विद्यालय जाता है।
- सीमा पुस्तक पढ़ रही है।
- क्या तुमने भोजन कर लिया?
- कृपया दरवाज़ा बंद कर दीजिए।
- वाह! कितना सुंदर दृश्य है।
उपरोक्त सभी उदाहरण पूर्ण अर्थ प्रदान करते हैं, इसलिए ये सभी वाक्य हैं।
उदाहरण
अशुद्ध समूह: विद्यालय राम जाता
ऊपर दिए गए शब्द किसी स्पष्ट अर्थ का बोध नहीं कराते।
शुद्ध वाक्य: राम विद्यालय जाता है।
यह पूर्ण अर्थ देता है, इसलिए यह वाक्य है।
वाक्य की परिभाषा
विभिन्न व्याकरणाचार्यों ने वाक्य की परिभाषा अपने-अपने दृष्टिकोण से दी है। सभी परिभाषाओं का मूल उद्देश्य यही है कि वाक्य ऐसा शब्द-समूह हो जो पूर्ण अर्थ का बोध कराए।
वाक्य की परिभाषा (प्रमुख विद्वानों के अनुसार)
भारतीय तथा आधुनिक हिंदी व्याकरण के अनेक विद्वानों ने वाक्य की परिभाषा दी है। यद्यपि उनकी अभिव्यक्ति में कुछ भिन्नता दिखाई देती है, परंतु सभी का मूल आशय यही है कि वाक्य वह सार्थक शब्द-समूह है, जो पूर्ण अर्थ का बोध कराए।
1. पाणिनि
पाणिनि ने अपने व्याकरण में वाक्य की पृथक परिभाषा नहीं दी है, किंतु उनके सूत्रों से स्पष्ट होता है कि परस्पर अपेक्षा रखने वाले पदों के योग से अर्थपूर्ण कथन की रचना होती है।
2. पतंजलि
पतंजलि के अनुसार वह पद-समूह, जिसके द्वारा श्रोता को पूर्ण अर्थ का बोध हो जाए, वाक्य कहलाता है।
3. भर्तृहरि
भर्तृहरि ने 'वाक्यपदीय' में वाक्य को भाषा की मूल इकाई माना है। उनके अनुसार शब्दों का वास्तविक अर्थ वाक्य में ही पूर्ण रूप से प्रकट होता है।
4. आचार्य कामताप्रसाद गुरु
"विचार को पूर्ण रूप से प्रकट करने वाले शब्द-समूह को वाक्य कहते हैं।"
यह परिभाषा हिंदी व्याकरण की सर्वाधिक प्रचलित परिभाषाओं में से एक है और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अक्सर पूछी जाती है।
5. डॉ. भोलानाथ तिवारी
डॉ. भोलानाथ तिवारी के अनुसार वाक्य भाषा की वह पूर्ण इकाई है, जिसके द्वारा वक्ता अपना आशय स्पष्ट रूप से व्यक्त करता है।
6. डॉ. वासुदेवनंदन प्रसाद
डॉ. वासुदेवनंदन प्रसाद के अनुसार पूर्ण अर्थ का बोध कराने वाला व्यवस्थित शब्द-समूह वाक्य कहलाता है।
- कामताप्रसाद गुरु की परिभाषा सर्वाधिक पूछी जाती है।
- भर्तृहरि ने वाक्य को भाषा की मूल इकाई माना है।
- आधुनिक हिंदी व्याकरण में "पूर्ण अर्थ का बोध" वाक्य की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता मानी जाती है।
वाक्य के आवश्यक तत्त्व
केवल शब्दों का समूह वाक्य नहीं कहलाता। किसी शब्द-समूह को वाक्य बनने के लिए उसमें कुछ आवश्यक गुणों का होना अनिवार्य है। इन्हीं को वाक्य के आवश्यक तत्त्व कहा जाता है।
1. सार्थकता
वाक्य का अर्थ स्पष्ट और पूर्ण होना चाहिए। यदि अर्थ अधूरा या अस्पष्ट हो, तो वह वाक्य नहीं माना जाएगा।
उदाहरण: राम पुस्तक पढ़ता है।
2. पदों का उचित क्रम
वाक्य में शब्दों का क्रम भाषा के नियमों के अनुसार होना चाहिए। गलत क्रम अर्थ को बदल सकता है या समाप्त कर सकता है।
अशुद्ध: पढ़ता राम है पुस्तक।
शुद्ध: राम पुस्तक पढ़ता है।
3. पूर्ण भाव
वाक्य किसी विचार, सूचना, प्रश्न, आदेश या भावना को पूर्ण रूप से व्यक्त करे।
उदाहरण: आज मौसम बहुत सुहावना है।
4. आकांक्षा की पूर्ति
वाक्य सुनने या पढ़ने के बाद अर्थ अधूरा न लगे। श्रोता की जिज्ञासा वहीं समाप्त हो जानी चाहिए।
5. योग्यता
वाक्य में प्रयुक्त शब्द अर्थ की दृष्टि से एक-दूसरे के अनुकूल होने चाहिए।
अशुद्ध: पत्थर पानी पीता है।
शुद्ध: लड़का पानी पीता है।
6. आसक्ति (संबद्धता)
वाक्य के सभी पद एक-दूसरे से जुड़े हुए हों और मिलकर एक ही भाव को व्यक्त करें।
वाक्य के मुख्य अंग
प्रत्येक पूर्ण वाक्य के सामान्यतः दो मुख्य अंग माने जाते हैं— उद्देश्य और विधेय। किसी वाक्य का सही विश्लेषण करने तथा वाक्य-रचना को समझने के लिए इन दोनों का ज्ञान आवश्यक है।
1. उद्देश्य (Subject)
वाक्य में जिसके विषय में कुछ कहा जाता है, उसे उद्देश्य कहते हैं। सामान्यतः उद्देश्य कर्ता होता है।
उदाहरण
- राम विद्यालय जाता है।
- सीता गीत गा रही है।
- बच्चे मैदान में खेल रहे हैं।
उपरोक्त वाक्यों में राम, सीता तथा बच्चे उद्देश्य हैं।
2. विधेय (Predicate)
उद्देश्य के संबंध में जो कुछ कहा जाता है, उसे विधेय कहते हैं। विधेय में सामान्यतः क्रिया तथा उससे संबंधित अन्य पद सम्मिलित होते हैं।
उदाहरण
- राम विद्यालय जाता है।
- सीता गीत गा रही है।
- बच्चे मैदान में खेल रहे हैं।
उदाहरण
- बैठो। (उद्देश्य – तुम निहित है।)
- आइए। (उद्देश्य – आप निहित है।)
- चलो। (उद्देश्य – हम निहित है।)
वाक्य के भेद
हिंदी व्याकरण में वाक्यों का वर्गीकरण मुख्यतः दो आधारों पर किया जाता है।
- रचना के आधार पर
- अर्थ के आधार पर
प्रतियोगी परीक्षाओं में दोनों प्रकार के वर्गीकरण से प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए इनका अध्ययन विस्तार से करना आवश्यक है।
रचना के आधार पर वाक्य के भेद
रचना अथवा संरचना के आधार पर वाक्य तीन प्रकार के होते हैं—
- सरल वाक्य
- संयुक्त वाक्य
- मिश्र वाक्य
1. सरल वाक्य
जिस वाक्य में एक ही उद्देश्य और एक ही मुख्य क्रिया हो तथा केवल एक स्वतंत्र उपवाक्य हो, उसे सरल वाक्य कहते हैं।
उदाहरण
- राम पुस्तक पढ़ता है।
- सीमा विद्यालय जाती है।
- बच्चे खेल रहे हैं।
- मोहन खाना खाता है।
2. संयुक्त वाक्य
जिस वाक्य में दो या दो से अधिक स्वतंत्र उपवाक्य हों और वे और, तथा, लेकिन, किंतु, अथवा, या, परंतु आदि समुच्चयबोधक अव्ययों से जुड़े हों, उसे संयुक्त वाक्य कहते हैं।
उदाहरण
- राम विद्यालय गया और मोहन बाजार चला गया।
- मैंने बहुत समझाया, लेकिन वह नहीं माना।
- तुम पढ़ो या खेलो।
- वह मेहनत करता है, इसलिए सफल होता है।
3. मिश्र वाक्य
जिस वाक्य में एक प्रधान उपवाक्य तथा एक या एक से अधिक आश्रित उपवाक्य हों, उसे मिश्र वाक्य कहते हैं।
उदाहरण
- जो छात्र मेहनत करता है, वह सफल होता है।
- मैं जानता हूँ कि वह आएगा।
- जब वर्षा रुकेगी, तब हम बाहर जाएँगे।
- जिसने परिश्रम किया, उसी ने सफलता प्राप्त की।
अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद
अर्थ अथवा भाव के आधार पर वाक्य आठ प्रकार के माने जाते हैं। इस वर्गीकरण में यह देखा जाता है कि वाक्य से किस प्रकार का भाव व्यक्त हो रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इस विषय से अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं।
- विधानवाचक वाक्य
- निषेधवाचक वाक्य
- प्रश्नवाचक वाक्य
- आज्ञावाचक वाक्य
- इच्छावाचक वाक्य
- विस्मयादिबोधक वाक्य
- संदेहवाचक वाक्य
- संकेतवाचक वाक्य
1. विधानवाचक वाक्य
जिस वाक्य में किसी कार्य, घटना, अवस्था अथवा तथ्य का सामान्य रूप से कथन किया जाए, उसे विधानवाचक वाक्य कहते हैं। इसे निश्चयवाचक वाक्य भी कहा जाता है।
उदाहरण
- सूर्य पूर्व दिशा से निकलता है।
- राम प्रतिदिन विद्यालय जाता है।
- भारत एक लोकतांत्रिक देश है।
- गंगा भारत की प्रमुख नदी है।
2. निषेधवाचक वाक्य
जिस वाक्य में किसी कार्य के न होने, निषेध या मनाही का भाव व्यक्त हो, उसे निषेधवाचक वाक्य कहते हैं। ऐसे वाक्यों में सामान्यतः नहीं, मत, न आदि शब्दों का प्रयोग होता है।
उदाहरण
- मैं आज विद्यालय नहीं जाऊँगा।
- झूठ मत बोलो।
- वह अभी घर पर नहीं है।
- कक्षा में शोर मत करो।
3. प्रश्नवाचक वाक्य
जिस वाक्य में किसी बात को जानने के लिए प्रश्न पूछा जाए, उसे प्रश्नवाचक वाक्य कहते हैं।
उदाहरण
- तुम कहाँ जा रहे हो?
- क्या तुमने भोजन कर लिया?
- तुम्हारा नाम क्या है?
- बैठक कब प्रारम्भ होगी?
4. आज्ञावाचक वाक्य
जिस वाक्य में आदेश, अनुरोध, सलाह, उपदेश, अनुमति अथवा निषेध का भाव व्यक्त हो, उसे आज्ञावाचक वाक्य कहते हैं।
उदाहरण
- समय पर विद्यालय पहुँचो।
- कृपया बैठ जाइए।
- बड़ों का सम्मान करो।
- दरवाज़ा बंद कर दो।
5. इच्छावाचक वाक्य
जिस वाक्य में इच्छा, कामना, आशीर्वाद या शुभकामना का भाव प्रकट हो, उसे इच्छावाचक वाक्य कहते हैं।
उदाहरण
- ईश्वर तुम्हें दीर्घायु करे।
- तुम सदा सुखी रहो।
- भगवान तुम्हारी मनोकामना पूरी करें।
- काश! मैं भी वहाँ होता।
6. विस्मयादिबोधक वाक्य
जिस वाक्य में आश्चर्य, हर्ष, शोक, घृणा, भय, प्रशंसा अथवा अन्य तीव्र भाव प्रकट हों, उसे विस्मयादिबोधक वाक्य कहते हैं। ऐसे वाक्यों के अंत में सामान्यतः विस्मयादिबोधक चिह्न (!) लगाया जाता है।
उदाहरण
- वाह! कितना सुंदर दृश्य है।
- अरे! तुम यहाँ कैसे?
- हाय! उसका बहुत नुकसान हो गया।
- शाबाश! तुमने बहुत अच्छा कार्य किया।
7. संदेहवाचक वाक्य
जिस वाक्य में किसी कार्य या घटना के प्रति संदेह, संभावना अथवा अनुमान का भाव व्यक्त हो, उसे संदेहवाचक वाक्य कहते हैं।
उदाहरण
- शायद आज वर्षा हो जाए।
- संभव है वह कल आए।
- हो सकता है परीक्षा स्थगित हो जाए।
- कदाचित् वह घर पर न हो।
8. संकेतवाचक वाक्य
जिस वाक्य में किसी कार्य का होना किसी शर्त, कारण या परिस्थिति पर निर्भर हो, उसे संकेतवाचक वाक्य कहते हैं।
उदाहरण
- यदि तुम परिश्रम करोगे, तो सफल हो जाओगे।
- अगर वर्षा होगी, तो मैच नहीं होगा।
- यदि समय मिला, तो मैं अवश्य आऊँगा।
- यदि तुम बुलाओगे, तो मैं आ जाऊँगा।
- रचना के आधार पर वाक्य के 3 भेद होते हैं।
- अर्थ के आधार पर वाक्य के 8 भेद होते हैं।
- आज्ञावाचक वाक्य में आदेश, अनुरोध, सलाह और उपदेश—चारों प्रकार के भाव सम्मिलित हो सकते हैं।
- विधानवाचक वाक्य को निश्चयवाचक वाक्य भी कहा जाता है।
वाक्य और शब्द में अंतर
विद्यार्थी अक्सर शब्द और वाक्य में भ्रमित हो जाते हैं। शब्द भाषा की सबसे छोटी सार्थक इकाई है, जबकि वाक्य पूर्ण विचार को व्यक्त करने वाली इकाई है।
| आधार | शब्द | वाक्य |
|---|---|---|
| अर्थ | स्वतंत्र सार्थक इकाई | पूर्ण विचार व्यक्त करने वाला शब्द-समूह |
| संरचना | एक या एक से अधिक वर्णों से मिलकर बनता है। | एक या अधिक शब्दों से मिलकर बनता है। |
| भाव | पूर्ण विचार व्यक्त नहीं करता। | पूर्ण अर्थ एवं भाव व्यक्त करता है। |
| उदाहरण | विद्यालय, पुस्तक, जल, विद्यार्थी | विद्यार्थी विद्यालय जा रहे हैं। |
वाक्य और पद में अंतर
पद वह शब्द होता है जो वाक्य में प्रयुक्त होकर व्याकरणिक संबंध स्थापित करता है, जबकि वाक्य ऐसे पदों का व्यवस्थित समूह होता है जो पूर्ण अर्थ का बोध कराता है।
| आधार | पद | वाक्य |
|---|---|---|
| परिभाषा | वाक्य में प्रयुक्त व्याकरणिक रूप वाला शब्द | पूर्ण अर्थ देने वाला पद-समूह |
| अर्थ | अकेला पूर्ण विचार व्यक्त नहीं करता। | पूर्ण विचार व्यक्त करता है। |
| उदाहरण | राम, जाता, विद्यालय | राम विद्यालय जाता है। |
वाक्य की पहचान कैसे करें?
यदि किसी शब्द-समूह के बारे में यह समझना हो कि वह वाक्य है या नहीं, तो निम्नलिखित बातों की जाँच करें—
- क्या शब्दों का क्रम सही है?
- क्या उससे पूर्ण अर्थ निकल रहा है?
- क्या उसमें क्रिया का बोध हो रहा है?
- क्या श्रोता या पाठक को कोई संदेह नहीं रह जाता?
- क्या सभी शब्द एक ही भाव को व्यक्त कर रहे हैं?
यदि ये तीनों बातें उपस्थित हैं, तो वह शब्द-समूह सामान्यतः वाक्य होगा।
वाक्य से संबंधित सामान्य अशुद्धियाँ
| अशुद्ध वाक्य | शुद्ध वाक्य |
|---|---|
| राम विद्यालय जाता। | राम विद्यालय जाता है। |
| मैंने पुस्तक पढ़ी है कल। | मैंने कल पुस्तक पढ़ी है। |
| मोहन और सीता जा रहा है। | मोहन और सीता जा रहे हैं। |
| तुम कहाँ जा रहे। | तुम कहाँ जा रहे हो? |
| कक्षा में शोर नहीं करो मत। | कक्षा में शोर मत करो। |
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- वाक्य भाषा की पूर्ण एवं सार्थक इकाई है।
- वाक्य के दो मुख्य अंग— उद्देश्य और विधेय।
- रचना के आधार पर वाक्य के 3 भेद होते हैं।
- अर्थ के आधार पर वाक्य के 8 भेद होते हैं।
- सरल वाक्य में केवल एक स्वतंत्र उपवाक्य होता है।
- संयुक्त वाक्य में दो या दो से अधिक स्वतंत्र उपवाक्य होते हैं।
- मिश्र वाक्य में एक प्रधान तथा एक या अधिक आश्रित उपवाक्य होते हैं।
- कामताप्रसाद गुरु की वाक्य-परिभाषा प्रतियोगी परीक्षाओं में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
वाक्य किसे कहते हैं?
सार्थक शब्दों का ऐसा व्यवस्थित समूह, जो पूर्ण अर्थ का बोध कराए, वाक्य कहलाता है।
वाक्य के कितने भेद होते हैं?
रचना के आधार पर वाक्य के तीन तथा अर्थ के आधार पर आठ भेद होते हैं।
वाक्य के दो मुख्य अंग कौन-से हैं?
वाक्य के दो मुख्य अंग उद्देश्य और विधेय हैं।
सरल, संयुक्त और मिश्र वाक्य में क्या अंतर है?
सरल वाक्य में एक स्वतंत्र उपवाक्य, संयुक्त वाक्य में दो या अधिक स्वतंत्र उपवाक्य तथा मिश्र वाक्य में एक प्रधान एवं एक या अधिक आश्रित उपवाक्य होते हैं।
विधानवाचक वाक्य किसे कहते हैं?
जिस वाक्य में किसी तथ्य, घटना या कार्य का सामान्य कथन किया जाए, उसे विधानवाचक (निश्चयवाचक) वाक्य कहते हैं।
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निष्कर्ष
वाक्य भाषा की सबसे महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति इकाई है। इसके माध्यम से मनुष्य अपने विचार, भावनाएँ, प्रश्न, आदेश, इच्छाएँ तथा सूचनाएँ प्रभावी ढंग से व्यक्त करता है। हिंदी व्याकरण को गहराई से समझने के लिए वाक्य की परिभाषा, आवश्यक तत्त्व, उद्देश्य-विधेय तथा रचना एवं अर्थ के आधार पर उसके भेदों का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है।
यदि आपने इस लेख को ध्यानपूर्वक पढ़ लिया है, तो अब आप न केवल वाक्य किसे कहते हैं का उत्तर आसानी से दे सकेंगे, बल्कि विभिन्न प्रकार के वाक्यों की पहचान भी कर पाएँगे तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में इस विषय से जुड़े प्रश्नों का आत्मविश्वास के साथ उत्तर दे सकेंगे।
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