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स्वर एवं व्यंजन किसे कहते हैं? परिभाषा, भेद, उदाहरण | हिंदी व्याकरण

हिंदी भाषा के शुद्ध पठन और लेखन के लिए स्वर एवं व्यंजन का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। हिंदी वर्णमाला के सभी वर्ण मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किए जाते हैं— स्वर और व्यंजन। किसी भी शब्द का निर्माण इन्हीं दोनों के मेल से होता है।

विद्यालयी शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, UPPSC, UPTET, CTET, SSC, Railway, बैंक आदि) तथा विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में स्वर एवं व्यंजन से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इसलिए प्रत्येक विद्यार्थी को इनकी परिभाषा, भेद, उदाहरण तथा विशेषताओं का स्पष्ट ज्ञान होना चाहिए।

स्वर एवं व्यंजन किसे कहते हैं? हिंदी व्याकरण में स्वर और व्यंजन की परिभाषा, भेद, उदाहरण और 53वें वर्ण 'ळ' की जानकारी

विषय-सूची

  1. वर्ण किसे कहते हैं?
  2. स्वर किसे कहते हैं?
  3. स्वर के भेद
  4. स्वरों की मात्राएँ
  5. व्यंजन किसे कहते हैं?
  6. व्यंजन के भेद
  7. स्पर्श व्यंजनों के पाँच वर्ग
  8. अघोष एवं सघोष व्यंजन
  9. अल्पप्राण एवं महाप्राण
  10. संयुक्त व्यंजन
  11. स्वर एवं व्यंजन में अंतर
  12. महत्वपूर्ण तथ्य
  13. FAQ
  14. अभ्यास प्रश्न

वर्ण किसे कहते हैं?

भाषा की सबसे छोटी वह ध्वनि, जिसके और छोटे भाग नहीं किए जा सकते तथा जिसे लिखा और बोला जा सकता है, वर्ण कहलाती है।

उदाहरण: अ, आ, इ, ई, क, ख, ग, च आदि।

हिंदी वर्णमाला के सभी वर्ण दो भागों में विभाजित किए जाते हैं—

  • स्वर
  • व्यंजन
ध्यान दें: आधुनिक हिंदी वर्णमाला में सामान्यतः 53 वर्ण माने जाते हैं, जिनमें 'ळ' को 53वाँ वर्ण माना जाता है। विभिन्न व्याकरण ग्रंथों में वर्णों की संख्या को लेकर कुछ मतभेद मिलते हैं, इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते समय संबंधित पाठ्यक्रम का भी ध्यान रखें।

स्वर किसे कहते हैं?

जिन वर्णों का उच्चारण किसी अन्य वर्ण की सहायता के बिना स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है, उन्हें स्वर कहते हैं।

स्वरों के उच्चारण के समय मुख से निकलने वाली वायु बिना किसी विशेष अवरोध के बाहर निकल जाती है।

हिंदी के स्वर हैं—

अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ

विशेष जानकारी:

आधुनिक हिंदी में स्वर का प्रयोग अपेक्षाकृत कम होता है। यह मुख्यतः संस्कृत से आए शब्दों, जैसे ऋषि, ऋतु, ऋण, ऋचा आदि में मिलता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से को हिंदी के 11 स्वरों में शामिल किया जाता है।

उदाहरण:

  • अ – अनार
  • आ – आम
  • इ – इमली
  • ई – ईख
  • उ – उल्लू
  • ऊ – ऊन
  • ऋ – ऋषि
  • ए – एक
  • ऐ – ऐनक
  • ओ – ओखली
  • औ – औरत

स्वर के भेद

हिंदी व्याकरण में स्वरों का वर्गीकरण मुख्यतः उच्चारण में लगने वाले समय (मात्रा) के आधार पर किया जाता है। इस आधार पर स्वर तीन प्रकार के होते हैं।

  1. ह्रस्व स्वर
  2. दीर्घ स्वर
  3. प्लुत स्वर

1. ह्रस्व स्वर

जिन स्वरों के उच्चारण में सबसे कम समय लगता है, उन्हें ह्रस्व स्वर कहते हैं।

ह्रस्व स्वर हैं— अ, इ, उ, ऋ

उदाहरण:

  • अ – नार
  • इ – मली
  • उ – ल्लू
  • ऋ – षि

समझिए: इन स्वरों के उच्चारण में एक मात्रा का समय लगता है।

2. दीर्घ स्वर

जिन स्वरों के उच्चारण में ह्रस्व स्वरों की अपेक्षा अधिक समय लगता है, उन्हें दीर्घ स्वर कहते हैं।

दीर्घ स्वर हैं— आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ

उदाहरण:

  • आ –
  • ई –
  • ऊ –
  • ए –
  • ऐ – नक
  • ओ – खली
  • औ – रत

समझिए: इन स्वरों के उच्चारण में दो मात्राओं का समय लगता है।

3. प्लुत स्वर

जिन स्वरों के उच्चारण में तीन मात्राओं या उससे अधिक समय लगता है, उन्हें प्लुत स्वर कहते हैं।

प्लुत स्वर का प्रयोग सामान्य बोलचाल में बहुत कम तथा वैदिक मंत्रों, पुकारने या विशेष बल देने के लिए किया जाता है।

उदाहरण:

  • आऽऽओ
  • ओऽऽम्
  • हे रामऽऽ!
याद रखें:
  • ह्रस्व स्वर = 1 मात्रा
  • दीर्घ स्वर = 2 मात्राएँ
  • प्लुत स्वर = 3 या अधिक मात्राएँ
📌 याद रखने की आसान ट्रिक

ह्रस्व स्वर (4):
अ, इ, उ, ऋ

दीर्घ स्वर (7):
आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ

याद रखने का सूत्र:
अ, इ, उ, ऋ = ह्रस्व (1 मात्रा)
आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ = दीर्घ (2 मात्राएँ)

स्वरों की मात्राएँ

स्वर जब स्वतंत्र रूप से लिखे जाते हैं, तब उनका पूरा स्वरूप लिखा जाता है। किंतु जब वे किसी व्यंजन के साथ प्रयुक्त होते हैं, तब उनका मात्रा-चिह्न लगाया जाता है।

स्वर मात्रा उदाहरण
कोई मात्रा नहीं कमल
काम
ि किताब
सीता
कुल
फूल
कृपा
मेला
मैना
मोर
औरत
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण:
  • हिंदी में कुल 11 स्वर माने जाते हैं।
  • ह्रस्व स्वर – 4
  • दीर्घ स्वर – 7
  • प्लुत स्वर का प्रयोग सामान्य लेखन में नहीं किया जाता।
  • व्यंजन के साथ प्रयुक्त होने पर स्वर मात्रा के रूप में लिखे जाते हैं।

व्यंजन किसे कहते हैं?

जिन वर्णों का उच्चारण स्वरों की सहायता से किया जाता है, उन्हें व्यंजन कहते हैं। दूसरे शब्दों में, जिन वर्णों का स्वतंत्र रूप से उच्चारण नहीं किया जा सकता और जिनके उच्चारण में स्वर का सहयोग आवश्यक होता है, वे व्यंजन कहलाते हैं।

उदाहरण: क, ख, ग, घ, च, छ, ज, झ आदि।

समझिए: यदि केवल क् बोला जाए तो उसका उच्चारण पूर्ण नहीं होता। उसे बोलने के लिए स्वर का सहारा लेना पड़ता है, इसलिए वह व्यंजन कहलाता है।

व्यंजन के भेद

उच्चारण के आधार पर हिंदी के व्यंजनों को मुख्यतः तीन भागों में बाँटा जाता है।

  1. स्पर्श व्यंजन
  2. अन्तःस्थ व्यंजन
  3. ऊष्म व्यंजन

1. स्पर्श व्यंजन

जिन व्यंजनों का उच्चारण करते समय जीभ मुख के किसी भाग का स्पर्श करती है, उन्हें स्पर्श व्यंजन कहते हैं।

स्पर्श व्यंजन पाँच वर्गों में विभाजित हैं।

वर्ग व्यंजन
क वर्ग क, ख, ग, घ, ङ
च वर्ग च, छ, ज, झ, ञ
ट वर्ग ट, ठ, ड, ढ, ण
त वर्ग त, थ, द, ध, न
प वर्ग प, फ, ब, भ, म

2. अन्तःस्थ व्यंजन

जिन व्यंजनों का उच्चारण स्वर और व्यंजन के बीच की स्थिति में होता है, उन्हें अन्तःस्थ व्यंजन कहते हैं।

अन्तःस्थ व्यंजन हैं—

य, र, ल, व

उदाहरण:

  • यज्ञ
  • रथ
  • लता
  • वन

3. ऊष्म व्यंजन

जिन व्यंजनों के उच्चारण के समय मुख से गर्म वायु (ऊष्मा) निकलती है, उन्हें ऊष्म व्यंजन कहते हैं।

ऊष्म व्यंजन हैं—

श, ष, स, ह

उदाहरण:

  • शेर
  • षट्कोण
  • सड़क
  • हाथ

अघोष एवं सघोष व्यंजन

स्वरतंत्रियों (Vocal Cords) के कंपन के आधार पर व्यंजन दो प्रकार के होते हैं।

अघोष सघोष
क, ख ग, घ
च, छ ज, झ
ट, ठ ड, ढ
त, थ द, ध
प, फ ब, भ

समझिए: जिन व्यंजनों के उच्चारण में स्वरतंत्रियाँ नहीं काँपतीं, वे अघोष तथा जिनमें कंपन होता है, वे सघोष कहलाते हैं।

अल्पप्राण एवं महाप्राण

उच्चारण के समय निकलने वाली वायु की मात्रा के आधार पर व्यंजन दो प्रकार के होते हैं।

अल्पप्राण महाप्राण

समझिए: जिन व्यंजनों के उच्चारण में कम वायु निकलती है, वे अल्पप्राण तथा जिनमें अधिक वायु निकलती है, वे महाप्राण कहलाते हैं।

उच्चारण स्थान के आधार पर व्यंजन

उच्चारण के समय जीभ, तालु, कंठ, दाँत तथा होंठ आदि जिस स्थान पर सक्रिय होते हैं, उसके आधार पर व्यंजनों का वर्गीकरण किया जाता है। इसे उच्चारण स्थान कहते हैं।

उच्चारण स्थान व्यंजन
कण्ठ्य क, ख, ग, घ, ङ
तालव्य च, छ, ज, झ, ञ, य, श
मूर्धन्य ट, ठ, ड, ढ, ण, ष, ळ
दन्त्य त, थ, द, ध, न, ल, स
ओष्ठ्य प, फ, ब, भ, म

समझिए: उदाहरण के लिए का उच्चारण कंठ से होता है, इसलिए यह कण्ठ्य व्यंजन है, जबकि का उच्चारण दोनों होंठों के स्पर्श से होता है, इसलिए यह ओष्ठ्य व्यंजन कहलाता है।

संयुक्त व्यंजन

जब दो या दो से अधिक व्यंजन मिलकर एक नई ध्वनि का निर्माण करते हैं, तो उन्हें संयुक्त व्यंजन कहते हैं।

हिंदी में मुख्य संयुक्त व्यंजन हैं—

  • क्ष (क् + ष)
  • त्र (त् + र)
  • ज्ञ (ज् + ञ)
  • श्र (श् + र)

उदाहरण:

  • क्षमा
  • त्रिशूल
  • ज्ञान
  • श्रद्धा

स्वर एवं व्यंजन में अंतर

स्वर व्यंजन
स्वतंत्र रूप से बोले जा सकते हैं। स्वरों की सहायता से बोले जाते हैं।
उच्चारण में वायु बिना विशेष अवरोध के निकलती है। उच्चारण में कहीं न कहीं अवरोध उत्पन्न होता है।
हिंदी में 11 स्वर माने जाते हैं। आधुनिक हिंदी में प्रायः 42 व्यंजन माने जाते हैं।
स्वरों की मात्राएँ होती हैं। व्यंजनों के साथ स्वर की मात्रा लगाई जाती है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • हिंदी वर्णमाला में सामान्यतः 11 स्वर माने जाते हैं।
  • आधुनिक हिंदी में प्रायः 42 व्यंजन माने जाते हैं।
  • 'ळ' को आधुनिक हिंदी वर्णमाला का 53वाँ वर्ण माना जाता है।
  • क्ष, त्र, ज्ञ और श्र संयुक्त व्यंजन हैं, स्वतंत्र वर्ण नहीं।
  • ह्रस्व स्वरों में 1 मात्रा तथा दीर्घ स्वरों में 2 मात्राएँ होती हैं।
  • प्लुत स्वर का प्रयोग सामान्य लेखन में बहुत कम होता है।
⭐ परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण
  • हिंदी में सामान्यतः 11 स्वर और 42 व्यंजन माने जाते हैं।
  • ह्रस्व स्वर – 4 (अ, इ, उ, ऋ)
  • दीर्घ स्वर – 7 (आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ)
  • अन्तःस्थ व्यंजन – य, र, ल, व
  • ऊष्म व्यंजन – श, ष, स, ह
  • क्ष, त्र, ज्ञ और श्र संयुक्त व्यंजन हैं, स्वतंत्र वर्ण नहीं।
  • 'ळ' को आधुनिक हिंदी वर्णमाला का 53वाँ वर्ण माना जाता है।

हिंदी वर्णमाला में 52, 53, 54 या 56 वर्ण क्यों बताए जाते हैं?

हिंदी व्याकरण की विभिन्न पुस्तकों तथा समय-समय पर विकसित हुई परंपराओं के कारण वर्णों की संख्या के संबंध में अलग-अलग मत मिलते हैं। यही कारण है कि कहीं 52, कहीं 53, तो कहीं 54 या 56 वर्णों का उल्लेख मिलता है।

आधुनिक हिंदी व्याकरण तथा अधिकांश प्रतियोगी परीक्षाओं में 53 वर्ण स्वीकार किए जाते हैं, जिनमें 'ळ' को भी स्थान दिया जाता है।

विशेष जानकारी:

(मूर्धन्य पार्श्विक व्यंजन) को आधुनिक हिंदी वर्णमाला का 53वाँ वर्ण माना जाता है। इसका प्रयोग सामान्य हिंदी में बहुत कम होता है, जबकि संस्कृत एवं मराठी मूल के कुछ शब्दों में इसका प्रयोग अधिक मिलता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में समय-समय पर 'ळ' से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।

ध्यान दें: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते समय संबंधित परीक्षा के निर्धारित पाठ्यक्रम तथा मानक पुस्तकों का अनुसरण करना चाहिए।

⚠️ सामान्य भूलें
  • क्ष, त्र, ज्ञ और श्र को स्वतंत्र वर्ण समझना।
    ✅ ये संयुक्त व्यंजन हैं, स्वतंत्र वर्ण नहीं।
  • ❌ सभी व्यंजनों का उच्चारण स्वतंत्र रूप से हो सकता है।
    ✅ व्यंजनों के उच्चारण के लिए किसी न किसी स्वर की सहायता आवश्यक होती है।
  • ❌ ह्रस्व और दीर्घ स्वरों को एक समान समझना।
    ✅ ह्रस्व स्वरों के उच्चारण में कम तथा दीर्घ स्वरों के उच्चारण में अधिक समय लगता है।
  • ❌ 'ळ' को हिंदी वर्णमाला का भाग न मानना।
    ✅ आधुनिक हिंदी व्याकरण में 'ळ' को सामान्यतः 53वाँ वर्ण माना जाता है।

अभ्यास प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ)

  1. हिंदी में सामान्यतः कितने स्वर माने जाते हैं?
    • (क) 10
    • (ख) 11
    • (ग) 12
    • (घ) 13
  2. निम्नलिखित में से कौन-सा अन्तःस्थ व्यंजन है?
    • (क) श
    • (ख) र
    • (ग) क
    • (घ) म
  3. 'प' किस वर्ग का व्यंजन है?
    • (क) क वर्ग
    • (ख) त वर्ग
    • (ग) प वर्ग
    • (घ) च वर्ग
  4. 'ष' किस प्रकार का व्यंजन है?
    • (क) स्पर्श
    • (ख) अन्तःस्थ
    • (ग) ऊष्म
    • (घ) संयुक्त
  5. 'क्ष' क्या है?
    • (क) स्वर
    • (ख) स्वतंत्र व्यंजन
    • (ग) संयुक्त व्यंजन
    • (घ) मात्रा

लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. वर्ण किसे कहते हैं?
  2. स्वर किसे कहते हैं?
  3. व्यंजन किसे कहते हैं?
  4. ह्रस्व और दीर्घ स्वर में अंतर लिखिए।
  5. स्पर्श व्यंजन किसे कहते हैं?
  6. अन्तःस्थ व्यंजन कौन-कौन से हैं?
  7. ऊष्म व्यंजन कौन-कौन से हैं?
  8. संयुक्त व्यंजन किसे कहते हैं?
  9. अघोष एवं सघोष व्यंजन में अंतर लिखिए।
  10. अल्पप्राण एवं महाप्राण व्यंजन में अंतर लिखिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. स्वर किसे कहते हैं?

जिन वर्णों का उच्चारण किसी अन्य वर्ण की सहायता के बिना स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है, उन्हें स्वर कहते हैं।

2. हिंदी में कितने स्वर होते हैं?

आधुनिक हिंदी व्याकरण में सामान्यतः 11 स्वर माने जाते हैं।

3. व्यंजन किसे कहते हैं?

जिन वर्णों का उच्चारण स्वरों की सहायता से किया जाता है, उन्हें व्यंजन कहते हैं।

4. स्पर्श व्यंजन कितने वर्गों में विभाजित हैं?

स्पर्श व्यंजन पाँच वर्गों—क, च, ट, त और प वर्ग—में विभाजित हैं।

5. अन्तःस्थ व्यंजन कौन-कौन से हैं?

य, र, ल और व अन्तःस्थ व्यंजन हैं।

6. ऊष्म व्यंजन कौन-कौन से हैं?

श, ष, स और ह ऊष्म व्यंजन हैं।

7. संयुक्त व्यंजन कौन-कौन से हैं?

क्ष, त्र, ज्ञ और श्र प्रमुख संयुक्त व्यंजन हैं।

8. आधुनिक हिंदी वर्णमाला में कितने वर्ण माने जाते हैं?

आधुनिक हिंदी व्याकरण में सामान्यतः 53 वर्ण माने जाते हैं, जिनमें 'ळ' को भी स्थान दिया जाता है।


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