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चार वेद, छह शास्त्र (वेदांग)और अठारह पुराण – परिचय, वर्गीकरण एवं सम्पूर्ण प्रामाणिक जानकारी

भारतीय ज्ञान-परंपरा विश्व की सबसे प्राचीन एवं समृद्ध ज्ञान-परंपराओं में से एक है। इस परंपरा की नींव वेदों पर टिकी है, और इसी नींव पर उपनिषद, वेदांग, दर्शन-शास्त्र तथा पुराण जैसे अनेक ग्रंथों का विशाल भवन खड़ा हुआ है। प्रायः विद्यार्थियों और सामान्य पाठकों के मन में चार वेद, छह शास्त्र (वेदांग) तथा अठारह पुराणों को लेकर कई भ्रम रहते हैं — जैसे "छह शास्त्र" वास्तव में कौन-से हैं, अठारहवां पुराण वायु है या शिव, कौन-सा उपनिषद किस वेद से जुड़ा है, अथवा कल्पसूत्र क्या होते हैं।

अधिकांश लेख इस विषय पर केवल नामों की सूची तक सीमित रह जाते हैं। इस लेख में हम इससे आगे बढ़कर प्रत्येक ग्रंथ-समूह की प्रकृति, आंतरिक संरचना, संबंधित ब्राह्मण-आरण्यक ग्रंथों, तथा हर भ्रम के पीछे के वास्तविक कारण को भी विस्तार से, प्रामाणिक ढंग से समझेंगे।

वैदिक साहित्य की संरचना

भारतीय शास्त्र-परंपरा को मोटे तौर पर दो भागों में बांटा जाता है — श्रुति और स्मृति। श्रुति का अर्थ है वह ज्ञान जो ऋषियों ने साधना और श्रवण द्वारा प्राप्त किया — इसके अंतर्गत चारों वेद और उनसे जुड़े संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक तथा उपनिषद आते हैं। स्मृति वह साहित्य है जो बाद में स्मरण-परंपरा से रचा गया — इसमें वेदांग, दर्शन-शास्त्र, पुराण, रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ सम्मिलित हैं।

प्रत्येक वेद स्वयं भी चार भागों में विभक्त होता है:

  • संहिता — मूल मंत्र-भाग (स्तुतियाँ, यज्ञ-सूत्र)
  • ब्राह्मण — यज्ञ-कर्म की व्याख्या करने वाला गद्य-भाग
  • आरण्यक — वन में अध्ययन हेतु उपयुक्त, कर्मकांड से ज्ञानकांड की ओर संक्रमण का भाग
  • उपनिषद — दार्शनिक एवं आध्यात्मिक चिंतन का सर्वोच्च भाग

यह वर्गीकरण समझना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि इससे स्पष्ट होता है कि वेद, उपनिषद और पुराण एक ही श्रेणी के ग्रंथ नहीं, बल्कि भिन्न-भिन्न उद्देश्यों से रचे गए साहित्य हैं — और उपनिषद वस्तुतः वेदों का ही अभिन्न हिस्सा हैं, कोई अलग ग्रंथ नहीं।

चार वेद — परिचय

वेद शब्द संस्कृत की 'विद्' धातु से बना है, जिसका अर्थ है 'जानना'। वेद भारतीय ज्ञान-परंपरा के सबसे प्राचीन एवं मूल ग्रंथ माने जाते हैं। इन्हें चार भागों में विभाजित किया गया है, जिसे 'वेद-चतुष्टयी' कहा जाता है।

वेद मुख्य विषय-वस्तु विशेषता
ऋग्वेद देवताओं की स्तुति में रचे गए मंत्र (ऋचाएँ) विश्व का प्राचीनतम ज्ञात साहित्य; 10 मंडल, लगभग 1028 सूक्त
यजुर्वेद यज्ञ-कर्म की विधियाँ एवं मंत्र गद्य और पद्य दोनों में; शुक्ल तथा कृष्ण — दो शाखाओं में विभक्त
सामवेद ऋचाओं का संगीतमय गायन-रूप भारतीय शास्त्रीय संगीत का मूल स्रोत माना जाता है
अथर्ववेद लौकिक जीवन, चिकित्सा, रक्षा एवं कल्याण से जुड़े मंत्र दैनिक जीवन-व्यवहार से सर्वाधिक निकट; आयुर्विज्ञान के प्रारंभिक संकेत मिलते हैं
ऋग्वेद को विश्व के प्राचीनतम साहित्य होने का गौरव प्राप्त है, तथा यह मानव सभ्यता के सबसे पुराने लिखित दस्तावेज़ों में गिना जाता है।

वेदों के उपवेद

प्रत्येक वेद से जुड़ा एक व्यावहारिक शास्त्र भी विकसित हुआ, जिसे 'उपवेद' कहते हैं। ये उपवेद यह दर्शाते हैं कि वैदिक ज्ञान केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि अत्यंत व्यावहारिक भी था।

  1. आयुर्वेद (ऋग्वेद से संबद्ध) — चिकित्सा एवं स्वास्थ्य-विज्ञान
  2. धनुर्वेद (यजुर्वेद से संबद्ध) — युद्ध-कला एवं शस्त्र-विद्या
  3. गंधर्ववेद (सामवेद से संबद्ध) — संगीत, नृत्य एवं ललित कलाएँ
  4. स्थापत्यवेद/शिल्पवेद (अथर्ववेद से संबद्ध) — वास्तुकला एवं शिल्प-विज्ञान

प्रमुख उपनिषद और उनका सार

उपनिषद वेदों का अंतिम एवं दार्शनिक भाग हैं, इसीलिए इन्हें 'वेदांत' भी कहा जाता है। परंपरा के अनुसार उपनिषदों की कुल संख्या 108 मानी जाती है, किंतु इनमें से जिन 10 से 13 उपनिषदों पर आदि शंकराचार्य जैसे आचार्यों ने भाष्य लिखा, वे 'मुख्य उपनिषद' कहलाते हैं। केवल नाम रटने के बजाय हर उपनिषद के मूल भाव को समझना कहीं अधिक उपयोगी है:

उपनिषद मूल भाव / प्रमुख शिक्षा
ईश उपनिषद त्याग और ईश्वर-सर्वव्यापकता का संदेश — "ईशावास्यमिदं सर्वम्"
केन उपनिषद मन, प्राण और इंद्रियों को गति देने वाली परम सत्ता कौन है, इसकी खोज
कठ उपनिषद (कठोपनिषद) नचिकेता और यमराज का प्रसिद्ध संवाद — मृत्यु, आत्मा व ब्रह्म-ज्ञान पर चिंतन
प्रश्न उपनिषद छह जिज्ञासु ऋषियों द्वारा पूछे गए छह मूल प्रश्नों का समाधान
मुण्डक उपनिषद दो पक्षियों का प्रसिद्ध रूपक (जीवात्मा-परमात्मा); "सत्यमेव जयते" यहीं से है
माण्डूक्य उपनिषद ॐ (ओंकार) की व्याख्या तथा चेतना की चार अवस्थाएँ (जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति, तुरीय)
तैत्तिरीय उपनिषद पंचकोश सिद्धांत — अन्नमय से आनंदमय कोश तक आत्मा की यात्रा
ऐतरेय उपनिषद सृष्टि-रचना तथा आत्मा के स्वरूप का वर्णन
छान्दोग्य उपनिषद प्रसिद्ध महावाक्य "तत्त्वमसि" (वह तू ही है) का स्रोत
कौषीतकी उपनिषद प्राण की सर्वोच्च महत्ता तथा कर्म-सिद्धांत पर चिंतन
बृहदारण्यक उपनिषद सबसे विशाल उपनिषद; याज्ञवल्क्य-मैत्रेयी संवाद द्वारा आत्मज्ञान की व्याख्या
श्वेताश्वतर उपनिषद ईश्वरवादी (theistic) दृष्टिकोण से ब्रह्म की व्याख्या करने वाला उपनिषद

वेदांग (वेद के छह अंग) — विस्तार से

वेदों का सही उच्चारण, अर्थ और प्रयोग समझने के लिए छह सहायक शास्त्र विकसित किए गए, जिन्हें 'वेदांग' कहा जाता है। परंपरागत रूप से इन्हीं छह वेदांगों को 'छह शास्त्र' के नाम से भी जाना जाता है। प्रत्येक वेदांग से जुड़े प्रामाणिक ग्रंथ भी उल्लेखनीय हैं:

  1. शिक्षा — वर्णों के शुद्ध उच्चारण का विज्ञान (स्वर-विज्ञान); पाणिणीय शिक्षा इसका प्रमुख ग्रंथ है।
  2. कल्प — यज्ञ करने की विधि एवं नियम। कल्पसूत्र चार प्रकार के होते हैं — श्रौतसूत्र (बड़े यज्ञों की विधि), गृह्यसूत्र (गृहस्थ जीवन के षोडश संस्कार), धर्मसूत्र (सामाजिक आचार-नियम) और शुल्भसूत्र (यज्ञवेदी निर्माण हेतु ज्यामितीय गणना — भारतीय ज्यामिति के प्राचीनतम सूत्र यहीं मिलते हैं)।
  3. व्याकरण — भाषा के नियमों का शास्त्र। महर्षि पाणिणि की अष्टाध्यायी (लगभग 4000 सूत्र) तथा पतंजलि का महाभाष्य इसी परंपरा की अमूल्य देन हैं।
  4. निरुक्त — शब्दों की व्युत्पत्ति एवं मूल अर्थ का शास्त्र। यास्काचार्य कृत 'निरुक्त' इसका प्राचीनतम उपलब्ध ग्रंथ है।
  5. छंद — काव्य की लय एवं मात्रा का शास्त्र। पिंगल मुनि कृत 'छन्दःशास्त्र' इसका आधार-ग्रंथ है।
  6. ज्योतिष — यज्ञ एवं कर्मकांड हेतु शुभ काल-गणना का शास्त्र। लगध मुनि कृत 'वेदांग ज्योतिष' इसका प्राचीनतम ग्रंथ है।

षड्दर्शन — भारतीय दर्शन के छह शास्त्र

ध्यान देने योग्य बात यह है कि वेदांगों से भिन्न, भारतीय दर्शन-परंपरा में छह प्रमुख विचारधाराओं को भी बोलचाल में 'छह शास्त्र' कहा जाता है। इन्हें 'षड्दर्शन' कहते हैं:

  1. न्याय दर्शन (गौतम मुनि) — तर्क एवं प्रमाणों द्वारा सत्य की खोज
  2. वैशेषिक दर्शन (कणाद मुनि) — पदार्थ-विज्ञान एवं परमाणु-सिद्धांत
  3. सांख्य दर्शन (कपिल मुनि) — पुरुष और प्रकृति के द्वैत का सिद्धांत
  4. योग दर्शन (पतंजलि मुनि) — चित्तवृत्तियों के निरोध द्वारा आत्म-साक्षात्कार
  5. मीमांसा दर्शन (जैमिनि मुनि) — वैदिक कर्मकांड की व्याख्या
  6. वेदांत दर्शन (बादरायण/वेदव्यास) — ब्रह्म और आत्मा की एकता का प्रतिपादन

वेदांग और षड्दर्शन में अंतर: वेदांग वेदों को सही ढंग से पढ़ने-समझने के सहायक साधन हैं, जबकि षड्दर्शन स्वतंत्र दार्शनिक विचार-पद्धतियाँ हैं जो सृष्टि, आत्मा और ज्ञान जैसे प्रश्नों की व्याख्या करती हैं। दोनों को 'छह शास्त्र' कहा जाना ही अधिकांश भ्रम की जड़ है।

वेद, उपनिषद और पुराण — तुलनात्मक तालिका

तीनों साहित्य-रूपों को एक साथ रखकर देखने पर उनका अंतर सबसे स्पष्ट हो जाता है:

आधार वेद (संहिता) उपनिषद पुराण
श्रेणी श्रुति श्रुति (वेद का ही अंतिम भाग) स्मृति
मुख्य विषय देव-स्तुति एवं यज्ञ-कर्मकांड आत्मा, ब्रह्म एवं दार्शनिक ज्ञान कथा, इतिहास, वंशावली एवं भक्ति
शैली मंत्रात्मक दार्शनिक संवाद कथात्मक
मुख्य उद्देश्य कर्म एवं उपासना ज्ञान एवं मोक्ष सुगम कथाओं द्वारा जनसाधारण तक ज्ञान पहुँचाना

अठारह पुराण एवं उनका वर्गीकरण

'पुराण' शब्द का अर्थ है 'प्राचीन'। पुराण साहित्य में परंपरागत रूप से पाँच विषय (पंचलक्षण) समाहित माने जाते हैं — सर्ग (सृष्टि की उत्पत्ति), प्रतिसर्ग (प्रलय एवं पुनःसृष्टि), वंश (देवताओं व ऋषियों की वंशावली), मन्वन्तर (कालखंड), तथा वंशानुचरित (राजवंशों का इतिहास)। पुराणों की कुल संख्या अठारह मानी गई है, तथा इनमें आकार की दृष्टि से भी बड़ा अंतर है — स्कन्द पुराण सबसे विशालकाय पुराण माना जाता है।

पद्मपुराण के अनुसार अठारह पुराणों को उनकी प्रधान देवता-प्रवृत्ति के आधार पर तीन वर्गों में बांटा गया है:

वर्ग प्रधान देवता पुराण
सात्त्विक विष्णु विष्णु, भागवत, नारदीय, गरुड़, पद्म, वराह
राजसिक ब्रह्मा ब्रह्म, ब्रह्माण्ड, ब्रह्मवैवर्त, मार्कण्डेय, भविष्य, वामन
तामसिक शिव मत्स्य, कूर्म, लिंग, शिव, स्कन्द, अग्नि
उपर्युक्त 18 पुराणों में ब्रह्म पुराण को सबसे प्राचीन तथा स्कन्द पुराण को आकार में सबसे बड़ा माना जाता है।

रामायण और महाभारत

वेद-पुराणों के अतिरिक्त दो महाकाव्य भारतीय साहित्य के आधार-स्तंभ हैं:

  • रामायण (आदिकाव्य) — महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित, जिन्हें इसीलिए 'आदि कवि' कहा जाता है। यह भगवान श्रीराम के जीवन-चरित्र पर आधारित है तथा सात कांडों में विभक्त है।
  • महाभारत (जय संहिता) — महर्षि वेदव्यास रचित विश्व का सबसे विशाल महाकाव्य, जिसमें कुरुक्षेत्र के युद्ध सहित कौरव-पांडवों की गाथा 18 पर्वों में वर्णित है।

श्रीमद्भगवद्गीता

भगवद्गीता महाभारत के भीष्म पर्व का अंश है। कुरुक्षेत्र के युद्ध-क्षेत्र में स्वजनों को सम्मुख देख जब अर्जुन मोहग्रस्त हो जाते हैं, तब योगेश्वर श्रीकृष्ण उन्हें जो उपदेश देते हैं, वही श्रीमद्भगवद्गीता के नाम से जाना जाता है। इसमें 18 अध्याय एवं लगभग 700 श्लोक हैं।

श्रीरामचरितमानस

तुलसीदास द्वारा 16वीं शताब्दी में अवधी भाषा में रचित रामचरितमानस हिंदी-भाषी जनमानस में सर्वाधिक लोकप्रिय रामकथा है। यह सात कांडों में विभाजित है। इसके सातों कांडों के बारे में विस्तृत जानकारी यहाँ पढ़ें।

महत्वपूर्ण शब्दावली

श्रुतिवह ज्ञान जो ऋषियों ने साधना व श्रवण से प्राप्त किया — वेद व उपनिषद
स्मृतिस्मरण-परंपरा से रचा गया साहित्य — वेदांग, दर्शन, पुराण आदि
संहितावेद का मूल मंत्र-भाग
ब्राह्मण ग्रंथयज्ञ-कर्म की व्याख्या करने वाला गद्य-भाग
आरण्यकवन में अध्ययन हेतु उपयुक्त, कर्मकांड से ज्ञानकांड की ओर संक्रमण का भाग
पंचलक्षणपुराणों के पाँच अनिवार्य विषय — सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, मन्वन्तर, वंशानुचरित

महत्वपूर्ण तथ्य

  • वेद कुल चार हैं — ऋग्, यजु, साम, अथर्व; उपवेद भी चार हैं
  • प्रत्येक वेद के चार भाग होते हैं — संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद
  • मुख्य उपनिषद परंपरागत रूप से 10–13 माने जाते हैं (कुल संख्या 108)
  • वेदांग छह हैं — शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद, ज्योतिष
  • कल्पसूत्र चार प्रकार के हैं — श्रौत, गृह्य, धर्म, शुल्भ सूत्र
  • दर्शन-शास्त्र (षड्दर्शन) भी छह हैं, किंतु ये वेदांगों से भिन्न हैं
  • पुराण अठारह हैं, जो सात्त्विक, राजसिक व तामसिक — तीन वर्गों में बंटे हैं
  • महाभारत में 18 पर्व हैं; भगवद्गीता में भी 18 अध्याय हैं
  • "सत्यमेव जयते" मुण्डक उपनिषद से तथा "तत्त्वमसि" छान्दोग्य उपनिषद से लिया गया है

सामान्य भ्रम निवारक प्रश्नोत्तरी

भ्रम 1 — "छह शास्त्र" एक ही समूह है।
सत्य: "छह शास्त्र" शब्द दो अलग-अलग समूहों के लिए प्रयुक्त होता है — वेदांग (शिक्षा, कल्प, व्याकरण आदि) और षड्दर्शन (न्याय, वैशेषिक आदि)। संदर्भ देखकर ही तय होता है कि किसकी बात हो रही है।

भ्रम 2 — अठारहवां पुराण वायु है या शिव?
सत्य: यह भारतीय शास्त्र-परंपरा में ही एक चर्चित विषय रहा है। कुछ परंपराओं की सूची में शिव पुराण को अठारह पुराणों में गिना जाता है, तो कुछ प्राचीन सूचियों में इसके स्थान पर वायु पुराण मिलता है। यह भेद अलग-अलग परंपराओं और कालखंडों में सूची संकलित होने के कारण है।

भ्रम 3 — उपनिषद और पुराण एक ही प्रकार का साहित्य हैं।
सत्य: उपनिषद वेदों का ही दार्शनिक भाग (श्रुति) हैं, जबकि पुराण बाद की स्मृति-परंपरा के कथात्मक ग्रंथ हैं। दोनों का उद्देश्य और शैली भिन्न है।

भ्रम 4 — उपनिषद वेदों से अलग स्वतंत्र ग्रंथ हैं।
सत्य: प्रत्येक प्रमुख उपनिषद वास्तव में किसी न किसी वेद-शाखा के ब्राह्मण या आरण्यक भाग का ही अंश है — जैसे ईश उपनिषद शुक्ल यजुर्वेद का तथा तैत्तिरीय उपनिषद कृष्ण यजुर्वेद का भाग है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1. वेद कुल कितने हैं और उनके नाम क्या हैं?
उत्तर: वेद कुल चार हैं — ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।

प्रश्न 2. छह वेदांग कौन-कौन से हैं?
उत्तर: शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद और ज्योतिष — ये छह वेदांग हैं।

प्रश्न 3. पुराणों की कुल संख्या कितनी है?
उत्तर: पुराणों की कुल संख्या अठारह मानी जाती है, जिन्हें सात्त्विक, राजसिक और तामसिक तीन वर्गों में बांटा गया है।

प्रश्न 4. सबसे प्राचीन वेद कौन-सा है?
उत्तर: ऋग्वेद को विश्व के प्राचीनतम साहित्य होने का गौरव प्राप्त है।

प्रश्न 5. भगवद्गीता किस ग्रंथ का हिस्सा है?
उत्तर: भगवद्गीता महाभारत के भीष्म पर्व का अंश है।

प्रश्न 6. वेदांग और षड्दर्शन में क्या अंतर है?
उत्तर: वेदांग वेदों को समझने के छह सहायक अंग हैं, जबकि षड्दर्शन (न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा, वेदांत) स्वतंत्र दार्शनिक विचार-पद्धतियाँ हैं।

प्रश्न 7. कल्पसूत्र कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर: कल्पसूत्र चार प्रकार के होते हैं — श्रौतसूत्र, गृह्यसूत्र, धर्मसूत्र और शुल्भसूत्र।

प्रश्न 8. "तत्त्वमसि" महावाक्य किस उपनिषद से लिया गया है?
उत्तर: यह प्रसिद्ध महावाक्य छान्दोग्य उपनिषद से लिया गया है, जो सामवेद से संबद्ध है।

सारांश

चार वेद, उनके उपवेद, संहिता-ब्राह्मण-आरण्यक-उपनिषद की संरचना, छह वेदांग, षड्दर्शन तथा अठारह पुराण — ये सभी मिलकर भारतीय ज्ञान-परंपरा की वह समृद्ध शृंखला बनाते हैं जिसने सहस्राब्दियों तक भारतीय समाज, दर्शन और संस्कृति को दिशा दी है। इन ग्रंथों के मूल नामों को रटने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है यह समझना कि प्रत्येक ग्रंथ-समूह किस उद्देश्य से रचा गया, उसकी आंतरिक संरचना क्या है, और शेष ग्रंथों से वह किस प्रकार भिन्न है। आशा है यह लेख आपके इन सभी प्रश्नों को स्पष्ट करने में सहायक सिद्ध हुआ होगा।

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देवनागरी लिपि — उत्पत्ति, नामकरण व विशेषताएँ
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टिप्पणियाँ

  1. उत्तर
    1. अति आवश्यक जानकरी देने के लिए आपका आभार ब्यक्त करता हूं

      हटाएं
  2. भाई शिवपुराण कहा है आईएसएम

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    उत्तर
    1. Bhai Vayu puran hi shiv puran hai .

      हटाएं
    2. सही है क्या जाच ले

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    3. लिंग पुराण ही शिव पुराण है मेरे भाई

      हटाएं
  3. अति उत्तम लेख ! हम जैसे नौसिखए लोगों के लिए बहुत ही लाभदाई। प्रभुजी आप की ज्ञानकोष को और प्रज्वलित करे।

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  4. ऐसे ही ज्ञान की बाते सभी लोगो को भेजते रहे

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  5. बेनामी5/21/2019

    Ramcharitra manas vartaman kal mein sabse adhik gayan patthan aur adhayan kiya jata hein char ved, chein shastra aur athara Purana avam samasta rishi, muni aur santo Ka isme saransa hein

    जवाब देंहटाएं
  6. धन्यवाद
    आप लिखते है ,
    ।।।।अन्य महत्वपुर्ण ग्रंथ।।।
    श्रीमद्भगवद्गीता यह ताे वेदाे का सार है !
    सर्व सामान्य हिंदू इसे ही धर्म ग्रंथ मानता है!
    अैार काेर्ट सरकारी सभी जगह इसी ग्रंथ का महत्व है।
    आपने अन्य.... लिखा
    हमरा हिंदुईेकाे प्रमुख ग्रंथ
    श्री मद्भगवद्गीता है

    तथा हिंदू जानकारी देते वक्त बीच में कृपया येशु (हम सब प्रेषीताेंका आदर करते है) विग्यापन गूगल ना दे।

    जवाब देंहटाएं
  7. अद्भुत है हिन्दू वेद पुराण आदि का संग्रह। आज हमारे बच्चों को इसे पढाने की बहुत जरूरत है। 70 वर्ष की आयु मे मैं तो अनुभग्य रहा। अब समय ही नहीं बचा!!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. इंग्लिश मीडियम ने सब कुछ भुला दिया

      हटाएं
    2. App ayesa kyu kheh rhe hai appki iksha jarur puri hogi🙏

      हटाएं
  8. Kripya hame 4 vedas 6 shashtras ki
    Original copies chahiye, Hindi anuvad sahit. Kripya marg darshan Karen. Thanks

    जवाब देंहटाएं
  9. आप vedrishi.com से वेद, पुराण, उपनिषद् आदिक पुस्तकें मंगा सकते हैं। vedpuran.net पर अधिकांश पुस्तकें ऑनलाइन पढ़ सकते हैं अथवा pdf में डाऊनलोड कर सकते हैं।

    इसके अतिरिक्त गीताप्रेस, गोरखपुर से भी संपर्क कर सकते हैं।

    धन्यवाद् ।

    जवाब देंहटाएं
  10. बेनामी4/20/2020

    Bahut hi accha hai aapka gyan

    जवाब देंहटाएं
  11. bahut dhanyawad aapka aisa gyan dene ke liye

    जवाब देंहटाएं
  12. Ye char ved saha shasra aur athara puran sabhi devadhi dev mahadev se nirman huye hai yani omkar se omkar se hi sabhi ka nirman huva hai (om ) om se hi char ved bane fir vedose shasra fir puran bane

    जवाब देंहटाएं
  13. तंत्र शास्त्र और विमान शास्त्र ये किसके अन्तर्गत आता है ।

    जवाब देंहटाएं
  14. उत्तम जानकारी

    जवाब देंहटाएं
  15. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
  16. १८ पुराण मे शायद वायुपुराण के बजाय शिवपुराण होना चाहिए।

    जवाब देंहटाएं

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