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Ghazal | ग़ज़ल | हिंदी ग़ज़ल संग्रह | [बालकृष्ण द्विवेदी]

ग़ज़ल हिंदी और उर्दू साहित्य की एक लोकप्रिय काव्य-विधा है, जो कम शब्दों में गहरे भाव व्यक्त करने की क्षमता रखती है। प्रस्तुत ग़ज़ल जीवन, मानवीय संवेदनाओं और भावनात्मक अनुभवों को सहज एवं प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करती है। साहित्य प्रेमियों के लिए यह रचना निश्चय ही रुचिकर सिद्ध होगी।

पेश है एक नई गजल Ghazal बिल्कुल नए अंदाज़ में-

ghazal in hindi - लब पे शबनम
लब पे शबनम मगर सीने में आग रखता हूँ।
हर एक सवाल का सीधा जवाब रखता हूँ।।

उनसे कह दो कि भूल जायें मुक़ाबिल होना।
मैं अब चराग़ों की जगह आफ़ताब रखता हूँ।।

रोक ले मुझको ज़माना ये कहाँ मुमकिन है,
मैं अपने दिल में जज़्ब-ए-इंक़लाब रखता हूँ।।

उनकी रुसवाइयों का और ग़िला क्या करना।
बस अपने साथ गजल की किताब रखता हूँ।।

बाल कृष्ण द्विवेदी 'पंकज'

मेरी यह नई Ghazal आपको कैसी लगी? कृपया अपनी राय अवश्य दें।

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चित्र : साभार गूगल

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